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उत्तराखंड

अब जंगल के पड़ोस में जीना सीखेंगे लोग, वन्य जीवों से संघर्ष रोकने को बनेगी नई रणनीति

Web Editor
Last updated: 2026/05/08 at 4:39 PM
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3 Min Read
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Dehradun, 08 May 2026: Uttarakhand में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग अब नई सोच और रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। पहली बार ऐसी व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिसमें केवल वन्य जीवों को आबादी से दूर रखने पर ही नहीं, बल्कि लोगों को उनके साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व के तरीके सिखाने पर भी विशेष जोर रहेगा। राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष शमन रणनीति के तहत तैयार हो रही इस योजना का मुख्य उद्देश्य जान-माल की क्षति को न्यूनतम स्तर तक लाना है।
प्रदेश का लगभग 71 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। ऐसे में गुलदार, हाथी, भालू, जंगली सूअर और बंदरों जैसे वन्य जीवों की आवाजाही आबादी वाले इलाकों तक बढ़ती जा रही है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में गुलदार और तराई में हाथियों के हमलों की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। कई गांवों में लोग शाम होने के बाद घरों से बाहर निकलने से भी डरने लगे हैं।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2000 से 25 अप्रैल 2026 तक वन्यजीवों के हमलों में 1313 लोगों की मौत हुई है, जबकि 6727 लोग घायल हुए हैं। केवल वर्ष 2026 में अब तक 24 लोगों की जान जा चुकी है और 110 लोग घायल हुए हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए अब विभाग ग्रामीणों को व्यवहारिक प्रशिक्षण देने की तैयारी कर रहा है।
योजना के तहत गांवों में जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोगों को वन्य जीवों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में सुरक्षित रहने के तरीके बताए जाएंगे। ग्रामीणों को समूह में चलने, टॉर्च और शोर करने वाले उपकरण साथ रखने, बच्चों को अकेले न भेजने और रात में अनावश्यक आवाजाही से बचने जैसी सावधानियों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही वन्य जीव सामने आने पर घबराने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखने और तुरंत वन विभाग को सूचना देने के लिए भी जागरूक किया जाएगा।
सामुदायिक भागीदारी पर रहेगा फोकस
वन विभाग इस योजना में स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी बढ़ाएगा। इसके तहत वन्यजीव मित्र, स्वयंसेवक और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों का गठन किया जाएगा, ताकि किसी भी घटना पर तेजी से कार्रवाई की जा सके। विभाग का मानना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष का स्थायी समाधान केवल वन्य जीवों को पकड़ने में नहीं, बल्कि लोगों को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने की समझ देने में है।
Ranjan Mishra ने बताया कि योजना में संघर्ष वाले हॉटस्पॉट क्षेत्रों की मैपिंग, वैज्ञानिक शोध और निगरानी को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही सोलर फेंसिंग, कांटेदार तार और बायोफेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

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साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

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