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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > घास-पत्तियां खा छह दिन जिंदा रही जंगल में भटकी युवती, पुलिस-एसडीआरएफ के जवान बने देवदूत 
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घास-पत्तियां खा छह दिन जिंदा रही जंगल में भटकी युवती, पुलिस-एसडीआरएफ के जवान बने देवदूत 

Web Editor
Last updated: 2026/07/08 at 5:29 AM
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3 Min Read
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Ranikhet 08 july 2026। कभी-कभी जिंदगी की जंग सिर्फ हौसले के दम पर जीती जाती है। रानीखेत के सुंदरखाल के घने जंगल में छह दिन तक लापता रही 28 वर्षीय युवती ने भूख से हार नहीं मानी। न खाने को भोजन था, न पीने का पानी। ऐसे में उसने घास और जंगली पत्तियां खाकर खुद को जीवित रखा। आखिरकार ग्रामीणों ने उसकी आवाज सुनी और पुलिस व एसडीआरएफ की संयुक्त टीम ने उसे जंगल से सुरक्षित निकाल लिया। फिलहाल युवती का उपचार राजकीय चिकित्सालय, रानीखेत में चल रहा है।
रानीखेत के पास एक गाव की रहने वाली युवती एक जुलाई को अपने पिता के साथ सुंदरखाल जंगल गई थी। जंगल में घूमने के दौरान वह पिता से बिछड़ गई और रास्ता भटककर जंगल के भीतर चली गई। काफी देर तक तलाश के बावजूद जब उसका कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। घटनास्थल के पास उसकी एक चप्पल मिलने से आशंका और गहरा गई। इसके बाद थाना रानीखेत पुलिस और एसडीआरएफ पोस्ट सरियापानी की टीम ने संयुक्त सर्च अभियान शुरू किया।
सुंदरखाल का जंगल वन्यजीवों की सक्रिय आवाजाही वाला इलाका माना जाता है। ऐसे में हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती रही। हालांकि शुरुआती जांच में किसी जंगली जानवर के हमले के कोई संकेत नहीं मिले।
मंगलवार को अभियान के दौरान चारा लेने जंगल पहुंचे ग्रामीणों ने दूर से किसी महिला के मदद के लिए चिल्लाने की आवाज सुनी। सूचना मिलते ही उपनिरीक्षक पंकज डंगवाल के नेतृत्व में एसडीआरएफ टीम मौके पर पहुंची और सुंदरखाल से करीब 12 से 13 किलोमीटर भीतर दुर्गम जंगल में युवती को घायल अवस्था में खोज निकाला।
युवती ने बताया कि पिता से बिछड़ने के बाद वह पूरी तरह रास्ता भूल गई थी। कई दिनों तक उसे न भोजन मिला और न पीने का पानी। मजबूरी में उसने घास और जंगली वनस्पतियां खाकर खुद को जीवित रखा।
एसडीआरएफ ने मौके पर प्राथमिक उपचार देने के बाद युवती को स्ट्रेचर से कई किलोमीटर पैदल लाकर रोड हेड तक पहुंचाया। वहां से एम्बुलेंस के जरिए उसे राजकीय चिकित्सालय, रानीखेत भेजा गया।

बॉक्स

: ग्रामीणों ने सुनी मदद की पुकार

 

मंगलवार को चारा लेने जंगल पहुंचे ग्रामीणों ने दूर से महिला के चिल्लाने की आवाज सुनी। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और एसडीआरएफ को दी। आवाज के आधार पर बचाव दल ने सर्च अभियान तेज किया और लगभग 12 से 13 किलोमीटर भीतर घायल युवती तक पहुंचकर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

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