महायोजना-2041 पर सेक्टर-02 के नागरिकों से लिए सुझाव, 21 जुलाई तक 12 सेक्टरों में जारी रहेगी जनसुनवाई
Dehradun, 07 july 2026। राजधानी दून के सुनियोजित और संतुलित विकास के लिए तैयार की जा रही देहरादून महायोजना-2041 को जनभागीदारी से अंतिम रूप देने की दिशा में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने जनसंवाद अभियान तेज कर दिया है। अभियान के दूसरे दिन मंगलवार को सेक्टर-02 के लिए ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी परिसर में जनसुनवाई शिविर आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, भू-स्वामी और अन्य हितधारक पहुंचे। लोगों ने महायोजना से जुड़े विभिन्न प्रावधानों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के साथ ही भविष्य के दून को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
जनसुनवाई के दौरान नागरिकों ने भू-उपयोग, सड़क एवं यातायात व्यवस्था, आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के विकास, सार्वजनिक सुविधाओं, हरित क्षेत्रों के संरक्षण तथा भविष्य की आधारभूत आवश्यकताओं से जुड़े मुद्दे अधिकारियों के समक्ष रखे। एमडीडीए की टीम ने सभी सुझावों और आपत्तियों का विधिवत अभिलेखीकरण किया। प्राधिकरण के अनुसार प्रत्येक प्रकरण का तकनीकी और विधिक परीक्षण किया जाएगा तथा व्यवहारिक सुझावों को महायोजना में शामिल करने पर विचार होगा।
एमडीडीए का कहना है कि तेजी से बढ़ती आबादी, बदलते भू-उपयोग, वाहनों के बढ़ते दबाव और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच दून के भविष्य की योजना स्थानीय लोगों की भागीदारी के बिना तैयार नहीं की जा सकती। इसी उद्देश्य से शहर को 12 सेक्टरों में बांटकर अलग-अलग स्थानों पर जनसुनवाई शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
प्राधिकरण के अनुसार 6 जुलाई से 21 जुलाई तक सभी 12 सेक्टरों में यह अभियान जारी रहेगा। बुधवार को सेक्टर-03 के नागरिकों के लिए दून यूनिवर्सिटी परिसर में जनसुनवाई होगी, जहां लोग अपनी आपत्तियां और सुझाव सीधे अधिकारियों के समक्ष रख सकेंगे।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 शहर के भविष्य का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। नागरिकों से मिलने वाले सुझाव इसे अधिक व्यावहारिक, संतुलित और जनहितैषी बनाएंगे। वहीं, सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि सभी आपत्तियों और सुझावों का पारदर्शी तरीके से तकनीकी एवं विधिक परीक्षण किया जाएगा, ताकि विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करते हुए दून के सुनियोजित भविष्य की मजबूत आधारशिला रखी जा सके।




