Dehradun, 08 july 2026 । मानसून के दौरान बाढ़ जोखिम को कम करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने सभी प्रमुख बांधों और बैराजों की रियल टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। अब राज्य के सभी बांध एवं बैराज प्रतिदिन सुबह 8 बजे और शाम 8 बजे अपने जलाशयों का जलस्तर, इनफ्लो, आउटफ्लो और डिस्चार्ज की रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) को भेजेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए के राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को मानसून के दौरान समन्वय और निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी बांध या बैराज से पानी छोड़ा जाना प्रस्तावित हो तो इसकी पूर्व सूचना राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और संबंधित जिला प्रशासन को देना अनिवार्य होगा। सूचना में यह भी बताना होगा कि छोड़ा गया पानी कितने समय में किन क्षेत्रों तक पहुंचेगा, डाउनस्ट्रीम इलाकों में नदी का जलस्तर कितना बढ़ सकता है और संभावित प्रभाव क्या होंगे, ताकि समय रहते लोगों को सतर्क कर आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा सकें।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि नदी जलस्तर सेंसर और डिस्चार्ज मॉनिटरिंग सिस्टम से प्राप्त आंकड़े एपीआई के माध्यम से रियल टाइम यूएसडीएमए के साथ साझा किए जाएं। सभी जलविद्युत परियोजनाओं को ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और अर्ली वार्निंग सिस्टम का विस्तार करने के निर्देश दिए गए। टिहरी हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन को अपने क्षेत्र में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 25 करने के लिए कहा गया है।
इसके अलावा अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम बांधों के बीच जलस्तर, वर्षा और डिस्चार्ज संबंधी सूचनाओं के नियमित आदान-प्रदान, चेतावनी सायरनों और सेंसरों की नियमित टेस्टिंग तथा बाढ़ संभावित क्षेत्रों में मशीनरी की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। इससे मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।
उत्तराखंड में मानसून में बांधों की होगी रियल टाइम निगरानी, पानी छोड़ने से पहले बताना होगा असर
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