मसूरी के होटल एनजीटी की रडार पर, 49 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की धीमी रफ्तार पर फूटा गुस्सा
पीसीबी से पूछा—जुर्माना
MUSSOORIE, 10 JULY 2026। मसूरी के 49 होटलों में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूकेपीसीबी) की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली भी सुनिश्चित की जाए। पीसीबी को छह सप्ताह के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ के समक्ष पीसीबी ने बताया कि 49 डिफॉल्टर होटलों में से 19 पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का अंतिम निर्धारण कर जुर्माना लगाया जा चुका है। हालांकि, कई होटल संचालकों ने इस कार्रवाई के खिलाफ अपील दायर कर दी है, जबकि कुछ ने अब तक जुर्माने की राशि जमा भी नहीं कराई है। बोर्ड ने स्वीकार किया कि अब तक केवल कुछ मामलों में ही वसूली हो सकी है।
पीसीबी के अनुसार शेष 30 होटलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से 12 पर अब पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगा दी गई है, जबकि 18 मामलों में कार्रवाई अंतिम चरण में है। बोर्ड ने भरोसा दिया कि अगले चार सप्ताह में सभी लंबित मामलों में अंतिम आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
सुनवाई के दौरान एनजीटी ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि बोर्ड यह नहीं बता सका कि संबंधित 49 होटलों के पास वर्तमान में वैध कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) है या नहीं। पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना वैध सीटीओ किसी भी होटल का संचालन नहीं होना चाहिए। साथ ही जल, वायु, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी।
क्या है सीटीओ?
कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनिवार्य अनुमति है। इसके बिना कोई होटल, उद्योग या व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालन नहीं कर सकता। यह अनुमति तभी मिलती है जब सीवेज, ठोस कचरा, वायु और ध्वनि प्रदूषण सहित सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित हो।




