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Reading: किताबों से निकलकर खेतों में उतर रहे ‘एग्री साइंटिस्ट’, पंतनगर का नया मॉडल बना मिसाल
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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > किताबों से निकलकर खेतों में उतर रहे ‘एग्री साइंटिस्ट’, पंतनगर का नया मॉडल बना मिसाल
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किताबों से निकलकर खेतों में उतर रहे ‘एग्री साइंटिस्ट’, पंतनगर का नया मॉडल बना मिसाल

Web Editor
Last updated: 2026/07/10 at 2:53 PM
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Dehradun, 10 July 2026। भविष्य के कृषि वैज्ञानिक अब केवल लैब में प्रयोग नहीं करेंगे, बल्कि खेत में पसीना बहाकर खेती की हर बारीकी सीखेंगे। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा नीति के अनुरूप ऐसा मॉडल तैयार किया है, जहां छात्र बीज बोने से लेकर फसल बेचने तक पूरी जिम्मेदारी खुद निभा रहे हैं। उद्देश्य ऐसे कृषि वैज्ञानिक तैयार करना है, जो किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझकर जमीन से जुड़े समाधान विकसित कर सकें।
विश्वविद्यालय की ‘प्रैक्टिकल क्रॉप प्रोडक्शन स्किलिंग’ योजना के तहत करीब 160 छात्र 10 हेक्टेयर कृषि फार्म में व्यवहारिक प्रशिक्षण ले रहे हैं। इस भूमि को 20 प्लॉटों में विभाजित किया गया है और प्रत्येक 0.5 हेक्टेयर प्लॉट की जिम्मेदारी आठ विद्यार्थियों की टीम को दी गई है।
संकाय सदस्यों की निगरानी में छात्र खेत की तैयारी, नर्सरी, रोपाई, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, फसल की निगरानी, कटाई और विपणन तक की पूरी प्रक्रिया स्वयं संचालित कर रहे हैं। वे लागत, उत्पादन और बाजार की मांग का विश्लेषण भी सीख रहे हैं। फसल बिक्री से होने वाली आय का लाभ भी विद्यार्थियों को मिलेगा, जिससे उनमें कृषि उद्यमिता की सोच विकसित होगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि व्यवहारिक ज्ञान और नवाचार से लैस ऐसे कृषि वैज्ञानिक तैयार करना है, जो खेती में बदलाव ला सकें।
इस पहल की सराहना हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कर चुके हैं। उन्होंने छात्रों के साथ धान की रोपाई करते हुए कहा था कि यह मॉडल देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों के लिए प्रेरणादायी है, क्योंकि खेत में सीखने वाला छात्र ही भविष्य में किसानों के लिए प्रभावी वैज्ञानिक समाधान विकसित कर सकेगा।

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