Dehradun, 17 october 2026 । जंगलों के बीच से गुजरने वाले हाईवे अब वन्यजीवों की आवाजाही में बाधा नहीं बनेंगे। हाथी, बाघ, तेंदुए और अन्य जंगली जानवरों को सड़क पार करने के दौरान होने वाले खतरे से बचाने के लिए देशभर में विशेष संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से राष्ट्रीय राजमार्गों पर 2150 से अधिक ऐसी संरचनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इनमें कई का निर्माण पूरा हो चुका है। इन उपायों का उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ सड़क दुर्घटनाओं को कम करना है।
एनएचएआई ने वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए कार्यों पर एक विशेष दस्तावेज तैयार किया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में इसका अनावरण किया। दस्तावेज के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े उपायों पर करीब 19,700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
अंडरपास और ओवरपास से जंगलों को जोड़ने की पहल
हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों और वन्यजीवों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाने के लिए अंडरपास, ओवरपास, सुरंग, ऊंचे पुल और वन्यजीव अनुकूल पुलिया बनाई जा रही हैं। इनकी मदद से जंगली जानवर सड़क पर आए बिना हाईवे के एक ओर से दूसरी ओर जा सकेंगे। पेड़ों की ऊपरी शाखाओं के बीच आवाजाही करने वाले वन्यजीवों के लिए कैनोपी क्रॉसिंग जैसी व्यवस्थाएं भी विकसित की जा रही हैं।
वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए कैमरा ट्रैप का इस्तेमाल किया जा रहा है। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में गति नियंत्रण के उपायों के साथ चेतावनी संकेतक लगाए जा रहे हैं। इससे वाहन चालकों को वन्यजीवों की संभावित मौजूदगी के प्रति सतर्क किया जा सकेगा और जानवरों के साथ वाहनों की टक्कर की आशंका कम होगी।
विभिन्न संरचनाओं पर हजारों करोड़ का निवेश
वन्यजीव सुरक्षा से जुड़े निर्माण कार्यों में अंडरपास पर करीब 4,600 करोड़ रुपये, ओवरपास पर 650 करोड़ रुपये, ऊंचे पुलों यानी वायडक्ट पर 8,300 करोड़ रुपये और सुरंगों पर 2,800 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा बड़े पुलों पर 2,500 करोड़ और छोटे पुलों पर 500 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
उत्तराखंड में हाथियों की आवाजाही के लिए पांच संरचनाएं
वनों और वन्यजीवों की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में भी इस दिशा में काम किया जा रहा है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर और भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश हाईवे परियोजना में वन्यजीवों की सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
भानियावाला-ऋषिकेश परियोजना में एक ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास और चार अलग हाथी अंडरपास प्रस्तावित हैं। इन संरचनाओं से हाथियों को हाईवे पर वाहनों के बीच से गुजरने के बजाय सुरक्षित रास्ता मिलेगा। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।




