By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: IIT रुड़की की स्टडी में खुलासा : देश के 10 फीसदी से अधिक जिले आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील
Share
Notification Show More
Latest News
IIT रुड़की की स्टडी में खुलासा : देश के 10 फीसदी से अधिक जिले आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील
उत्तराखंड
रोमांच के नाम पर जिंदगी से खिलवाड़
उत्तराखंड
फूलों की घाटी में नियंत्रित रहेगी पर्यटकों की संख्या
उत्तराखंड
देवप्रयाग में 150 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, दो की मौत; तीन घायल
उत्तराखंड
सांपों और मगरमच्छों को हीटर से मिलेगी गर्मी
Uncategorized
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > IIT रुड़की की स्टडी में खुलासा : देश के 10 फीसदी से अधिक जिले आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील
उत्तराखंड

IIT रुड़की की स्टडी में खुलासा : देश के 10 फीसदी से अधिक जिले आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील

Web Editor
Last updated: 2026/10/16 at 9:56 AM
Web Editor
Share
3 Min Read
SHARE

Dehradun, 16 october 2026। जिस इलाके में कभी बाढ़ तबाही मचाती है, वहां कुछ समय बाद सूखे का संकट भी गहरा सकता है। देश में बाढ़ और सूखे का खतरा अब अलग-अलग देखने के बजाय एक साथ समझने की जरूरत है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के शोधकर्ताओं के अध्ययन में सामने आया है कि देश के कई जिलों में बाढ़ और सूखे, दोनों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ रही है। इससे इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका, जल संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं पर दोहरा दबाव पड़ सकता है।

नेचर पोर्टफोलियो की शोध पत्रिका npj Natural Hazards में प्रकाशित इस अध्ययन में वर्ष 2001 और 2011 के दौरान देश के 591 जिलों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने सामाजिक, जनसांख्यिकीय और बुनियादी ढांचे से जुड़े आंकड़ों के आधार पर बाढ़ और सूखे के जोखिम को समझने के लिए मल्टी-हैजार्ड वल्नरेबिलिटी इंडेक्स (एमएचवीआई) तैयार किया।

अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2011 तक देश के पांच में से एक से अधिक जिले बाढ़ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में थे, जबकि करीब पांच में से एक जिले में सूखे का खतरा अधिक था। वहीं, 10 फीसदी से अधिक जिले ऐसे पाए गए, जहां कई तरह के खतरों के प्रति संवेदनशीलता ज्यादा थी।

यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में बढ़ी चिंता

शोध में ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों में बाढ़ और सूखे की संवेदनशीलता बढ़ने के संकेत मिले। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के जिले दोनों खतरों के लिहाज से अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल रहे।

 

अध्ययन का नेतृत्व करने वाले प्रो. मोहित प्रकाश मोहंती के अनुसार, बाढ़ और सूखे को अक्सर अलग-अलग आपदाओं के रूप में देखा जाता है, जबकि इनका असर एक ही सामाजिक और भौतिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।

जिलेवार योजना बनाने पर जोर

शोधकर्ताओं का कहना है कि केवल राज्य स्तर के आंकड़ों से स्थानीय समस्याओं की सही तस्वीर सामने नहीं आती। इसलिए जिलेवार आकलन के आधार पर आपदा प्रबंधन, जल संरक्षण, बुनियादी ढांचे और जलवायु अनुकूलन की योजनाएं तैयार करना जरूरी है। अध्ययन को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने सहयोग दिया। हालांकि, यह सूचकांक संवेदनशीलता का आकलन करता है, किसी आपदा के नुकसान की निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

You Might Also Like

रोमांच के नाम पर जिंदगी से खिलवाड़

फूलों की घाटी में नियंत्रित रहेगी पर्यटकों की संख्या

देवप्रयाग में 150 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, दो की मौत; तीन घायल

रुरुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटें जल्द

ज्योतिर्मठ में भालू का आतंक, एक ही परिवार के चार लोगों को किया घायल

TAGGED: IIT Roorkee Study: Rising Flood and Drought Vulnerability in India
Web Editor October 16, 2026
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article रोमांच के नाम पर जिंदगी से खिलवाड़
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

IIT रुड़की की स्टडी में खुलासा : देश के 10 फीसदी से अधिक जिले आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील
उत्तराखंड October 16, 2026
रोमांच के नाम पर जिंदगी से खिलवाड़
उत्तराखंड October 16, 2026
फूलों की घाटी में नियंत्रित रहेगी पर्यटकों की संख्या
उत्तराखंड October 15, 2026
देवप्रयाग में 150 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, दो की मौत; तीन घायल
उत्तराखंड October 15, 2026

Recent Posts

  • IIT रुड़की की स्टडी में खुलासा : देश के 10 फीसदी से अधिक जिले आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील
  • रोमांच के नाम पर जिंदगी से खिलवाड़
  • फूलों की घाटी में नियंत्रित रहेगी पर्यटकों की संख्या
  • देवप्रयाग में 150 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, दो की मौत; तीन घायल
  • सांपों और मगरमच्छों को हीटर से मिलेगी गर्मी

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • पहाड़ के स्वाद ने पार किया छह करोड़ का आंकड़ा, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ बना नया बाजार (13,741)
  • अब एआई और रोबोटिक्स सीखेंगे उत्तराखंड के स्कूली बच्चे (13,499)
  • क्यूआर कोड से मिलेगी कुंभ की पूरी जानकारी (12,813)
  • दुनियाभर में होगी उत्तराखंड के सेब की ब्राडिंग  (12,178)
  • चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में बनेंगे विशेष औद्योगिक पार्क: धामी (11,816)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?