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23 साल बाद फिर बाहर आया जेनी कांड का जिन्न

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Last updated: 2026/11/07 at 9:21 AM
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जैनी ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर लगाए गंभीर आरोप, डीएनए जांच पर जताया संदेह; डीजीपी से मिलकर दोबारा जांच और सुरक्षा की मांग की

Dehradun, 08 November 2026। उत्तराखंड की राजनीति में करीब 23 साल पहले हलचल मचाने वाला जैनी प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में है। दो दशक से अधिक समय तक लगभग शांत रहे इस मामले में अब नए आरोपों और पुराने जांच रिकॉर्ड पर सवालों ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इस बार मामला सिर्फ बेटे के पितृत्व और डीएनए जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना और तत्कालीन जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता भी सवालों के घेरे में है।

 

शनिवार को देहरादून पहुंचीं जैनी ने पूर्व मंत्री डा. हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी आपबीती सार्वजनिक की। उनका दावा है कि जब कथित घटनाएं हुईं, तब उनकी उम्र महज 16 साल थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरी के बहाने उन्हें अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया और इसी दौरान उनके साथ दुष्कर्म एवं यौन शोषण हुआ। जैनी ने यह भी दावा किया कि बच्चे को पिता का नाम देने की मांग उठाने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और पागलखाने में रखवाकर जबरन हस्ताक्षर कराए गए।

23 साल का बेटा, अब भी पहचान का सवाल

जैनी की मौजूदा लड़ाई का सबसे अहम पहलू उनका 23 वर्षीय बेटा है। उनका कहना है कि इतने वर्षों बाद भी बेटे को पिता का नाम और पहचान नहीं मिल पाई है। उन्होंने वर्ष 2003 में हुई डीएनए जांच पर सवाल उठाते हुए दोबारा डीएनए परीक्षण कराने की मांग की। साथ ही पूरे प्रकरण में नार्को टेस्ट कराने की भी मांग उठाई है। जैनी का आरोप है कि इतने वर्षों में हरक सिंह रावत ने उनके और बेटे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी नहीं उठाई।

 

पुराने जांच रिकॉर्ड पर भी उठाए सवाल

जैनी ने दावा किया कि तत्कालीन जांच के दौरान सीबीआई की टीम उनसे केवल एक बार मिली थी। उनका कहना है कि उस समय उनकी मानसिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह अपनी बात ठीक से रख सकें। अब वह पुराने घटनाक्रम और जांच प्रक्रिया की नए सिरे से पड़ताल चाहती हैं।

महेंद्र भट्ट के डीएनए टेस्ट पर नाराजगी

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के डीएनए टेस्ट की मांग को लेकर भी जैनी ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वह महेंद्र भट्ट को जानती तक नहीं हैं। ऐसे में उनके डीएनए टेस्ट की बात उठाने का कोई औचित्य नहीं है। उनका सवाल अपने और अपने बेटे के साथ कथित तौर पर हुए अन्याय को लेकर है।

 

2003 में इस्तीफे तक पहुंचा था मामला

वर्ष 2003 में तत्कालीन राजस्व मंत्री हरक सिंह रावत पर जैनी ने दुष्कर्म के आरोप लगाए थे। मामला विधानसभा तक पहुंचा और राजनीतिक दबाव के बीच हरक सिंह रावत को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति की थी। 25 जुलाई 2003 को सीबीआई ने जैनी के बयान के आधार पर मुकदमा दर्ज किया। जांच के दौरान बच्चे और हरक सिंह रावत के डीएनए नमूने लिए गए। रिपोर्ट में दोनों के नमूनों का मिलान नहीं होने की बात सामने आई, जिसके बाद हरक सिंह रावत को राहत मिली।

29 जुलाई 2016 को दिल्ली में हरक सिंह रावत के खिलाफ फिर एफआईआर दर्ज होने की खबर सामने आई थी। बाद में जैनी ने शिकायत वापस लेते हुए हरक को क्लीन चिट दी थी और राजनीतिक साजिश के आरोप लगाए थे।

डीजीपी से मिलकर मांगी सुरक्षा

शनिवार को जैनी ने पुलिस महानिदेशक से मुलाकात कर शिकायती पत्र सौंपा। उन्होंने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष दोबारा जांच कराने और बेटे का डीएनए टेस्ट कराने की मांग की। उनके नए आरोपों के बाद अब पुलिस के सामने पुराने जांच रिकॉर्ड और वर्तमान शिकायत के तथ्यों की पड़ताल की चुनौती है। हालांकि, जैनी के ताजा आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है और इस मामले में हरक सिंह रावत का पक्ष भी सामने आना बाकी है।

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TAGGED: Jenny Case Resurfaces After 23 Years, Serious Allegations Against Harak Singh Rawat
Web Editor November 7, 2026
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