By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: नेलांग घाटी में फिर खिलने लगी दुर्लभ हिमालयन लिली, एक साल बाद 61 फीसदी पौधे सुरक्षित
Share
Notification Show More
Latest News
नेलांग घाटी में फिर खिलने लगी दुर्लभ हिमालयन लिली, एक साल बाद 61 फीसदी पौधे सुरक्षित
Uncategorized
दिवाली से पहले राज्य कर्मचारियों को सौगात, डीए में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी
उत्तराखंड
गंगनानी में दर्दनाक हादसा: भागीरथी में समाई इनोवा, चार की मौत, दो लापता
उत्तराखंड
ब्लैक होल के आसपास एक्स-रे की चमक में उतार-चढ़ाव का खुला राज
उत्तराखंड
केदारताल में लापता आठ ट्रेकर्स की तलाश में उतरी निम की टीम, हेलीकॉप्टर से पहुंचाए जवान
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > Uncategorized > नेलांग घाटी में फिर खिलने लगी दुर्लभ हिमालयन लिली, एक साल बाद 61 फीसदी पौधे सुरक्षित
Uncategorized

नेलांग घाटी में फिर खिलने लगी दुर्लभ हिमालयन लिली, एक साल बाद 61 फीसदी पौधे सुरक्षित

Web Editor
Last updated: 2026/11/07 at 7:54 AM
Web Editor
Share
3 Min Read
SHARE

Dehradun, 07 November 2026। उत्तरकाशी की दुर्गम नेलांग घाटी में विलुप्ति के खतरे से जूझ रही दुर्लभ सफेद हिमालयन लिली के संरक्षण की उम्मीद मजबूत हुई है। वन विभाग की ओर से प्राकृतिक आवास में दोबारा रोपित किए गए इस प्रजाति के 61 प्रतिशत पौधे एक साल बाद भी जीवित मिले हैं। समुद्रतल से हजारों मीटर की ऊंचाई पर अत्यधिक ठंड और प्रतिकूल मौसम के बीच पौधों का सुरक्षित रहना हिमालयी जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

मुख्य वन संरक्षक (अनुसंधान) संजीव चतुर्वेदी के नेतृत्व में वर्ष 2025 में उत्तराखंड के पहले दुर्लभ वनस्पति पुनर्स्थापना कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य संकटग्रस्त वनस्पतियों को केवल नर्सरी तक सीमित रखने के बजाय उनके मूल प्राकृतिक आवास में दोबारा विकसित करना है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से शुरू की गई इस परियोजना के पहले चरण में 11 दुर्लभ प्रजातियों के करीब 1400 पौधे अलग-अलग स्थानों पर रोपित किए गए।

वर्ष 2026 में किए गए पहले आकलन में सात प्रजातियों के 42 से 100 प्रतिशत तक पौधे जीवित पाए गए। वन विभाग की अनुसंधान शाखा ने पौधों के प्राकृतिक आवास, मिट्टी, जलवायु और जैविक जरूरतों का अध्ययन करने के बाद उनके रोपण के लिए स्थानों का चयन किया था।

मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी के अनुसार, परियोजना में पौधों को दोबारा स्थापित करने के साथ उनकी वृद्धि और जीवित रहने की स्थिति की नियमित निगरानी भी की जा रही है। इससे भविष्य में दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

बॉक्स : प्रतिकूल परिस्थितियों में चुनौतीपूर्ण संरक्षण

नेलांग घाटी की सफेद हिमालयन लिली का वैज्ञानिक नाम लिलियम पॉलीफाइलम है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली इस दुर्लभ वनस्पति के लिए अत्यधिक ठंड, बर्फबारी, मिट्टी की नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव बड़ी चुनौती हैं। ऐसे कठिन वातावरण में 61 प्रतिशत पौधों का एक साल तक जीवित रहना संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत है।

बीज अंकुरण में भी 97 प्रतिशत तक सफलता

परियोजना के तहत कुछ दुर्लभ वनस्पतियों के पौधों की जीवित रहने की दर 100 प्रतिशत तक दर्ज की गई है। वहीं, कुछ प्रजातियों के बीजों का अंकुरण 97 प्रतिशत तक सफल रहा। वन अनुसंधान शाखा अगले पांच वर्षों तक इन प्रजातियों की निगरानी करेगी। इससे नर्सरी में पौधे तैयार करने और उन्हें प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करने की तकनीक को और बेहतर बनाया जा सकेगा।

 

You Might Also Like

कान्हा में नौ बाघों की मौत से उत्तराखंड में अलर्ट, कार्बेट-राजाजी में बढ़ेगी सतर्कता

वन्यजीवों की राह नहीं रोकेंगे हाईवे

पति के बिस्तर पर सांप छोड़ने वाली रविता को फांसी

सांपों और मगरमच्छों को हीटर से मिलेगी गर्मी

450 साल बदलेगा दुनिया का नक्शा

TAGGED: 61% Plants Survive, Rare Himalayan Lily Thrives in Nelang Valley
Web Editor November 7, 2026
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article दिवाली से पहले राज्य कर्मचारियों को सौगात, डीए में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

नेलांग घाटी में फिर खिलने लगी दुर्लभ हिमालयन लिली, एक साल बाद 61 फीसदी पौधे सुरक्षित
Uncategorized November 7, 2026
दिवाली से पहले राज्य कर्मचारियों को सौगात, डीए में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी
उत्तराखंड November 5, 2026
गंगनानी में दर्दनाक हादसा: भागीरथी में समाई इनोवा, चार की मौत, दो लापता
उत्तराखंड November 5, 2026
ब्लैक होल के आसपास एक्स-रे की चमक में उतार-चढ़ाव का खुला राज
उत्तराखंड November 5, 2026

Recent Posts

  • नेलांग घाटी में फिर खिलने लगी दुर्लभ हिमालयन लिली, एक साल बाद 61 फीसदी पौधे सुरक्षित
  • दिवाली से पहले राज्य कर्मचारियों को सौगात, डीए में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी
  • गंगनानी में दर्दनाक हादसा: भागीरथी में समाई इनोवा, चार की मौत, दो लापता
  • ब्लैक होल के आसपास एक्स-रे की चमक में उतार-चढ़ाव का खुला राज
  • केदारताल में लापता आठ ट्रेकर्स की तलाश में उतरी निम की टीम, हेलीकॉप्टर से पहुंचाए जवान

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • अब एआई और रोबोटिक्स सीखेंगे उत्तराखंड के स्कूली बच्चे (19,161)
  • पहाड़ के स्वाद ने पार किया छह करोड़ का आंकड़ा, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ बना नया बाजार (18,802)
  • क्यूआर कोड से मिलेगी कुंभ की पूरी जानकारी (18,334)
  • दुनियाभर में होगी उत्तराखंड के सेब की ब्राडिंग  (17,719)
  • चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में बनेंगे विशेष औद्योगिक पार्क: धामी (17,350)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?