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उत्तराखंड

अब घर बैठे मिलेगी सत्यापित खतौनी, छह वेब पोर्टलों से राजस्व सेवाएं हुईं पूरी तरह ऑनलाइन

Web Editor
Last updated: 2026/01/11 at 2:51 AM
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3 Min Read
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Verified Khatauni Online: Uttarakhand CM Launches 6 Revenue Web Portals

देहरादून, 11 जनवरी2026 :  उत्तराखंड में भूमि से जुड़े दस्तावेज और राजस्व सेवाएं अब पहले से कहीं अधिक आसान और पारदर्शी हो गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में राजस्व परिषद द्वारा विकसित राजस्व विभाग के छह महत्वपूर्ण वेब पोर्टलों का शुभारंभ किया। इन पोर्टलों के माध्यम से अब नागरिक मोबाइल या इंटरनेट के जरिए घर बैठे सत्यापित खतौनी सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे।
शुभारंभ किए गए पोर्टलों में ई-भूलेख (अपडेटेड वर्जन), भू-नक्शा, भूलेख अंश, भू-अनुमति, एग्री लोन और ई-वसूली (ई-आरसीएस) पोर्टल शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया परिकल्पना के अनुरूप है, जिससे विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से शासन को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अब नागरिकों को खतौनी की सत्यापित प्रति के लिए तहसीलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ई-भूलेख पोर्टल के जरिए ऑनलाइन भुगतान कर सत्यापित खतौनी डाउनलोड की जा सकेगी। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी, साथ ही पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होंगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार “सरलीकरण, समाधान और निस्तारण” के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। भूमि मानचित्र यानी कैडस्ट्रल मैप को भी अब सार्वजनिक डोमेन में निःशुल्क देखने की सुविधा दी गई है। इन नए वेब एप्लीकेशनों से ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूती मिलेगी और विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को गति मिलेगी।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव राजस्व एसएन पांडेय, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरु, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव, एनआईसी के वरिष्ठ अधिकारी सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी, मंडल आयुक्त और तहसील स्तर के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।
बॉक्स : भू-उपयोग परिवर्तन और भूमि क्रय की प्रक्रिया ऑनलाइन
भूलेख अंश पोर्टल के माध्यम से संयुक्त खातेदारी वाले खातों में खातेदारों और सहखातेदारों का पृथक-पृथक अंश निर्धारित किया जा सकेगा, जिससे किसानों की फार्मर रजिस्ट्री तैयार करने में मदद मिलेगी। वहीं भू-अनुमति पोर्टल के तहत भूमि उपयोग परिवर्तन और भूमि क्रय की अनुमति की प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन हो गई है।
बॉक्स : राजस्व वसूली भी ऑनलाइन
एग्री लोन पोर्टल से किसान अपनी भूमि के आधार पर बैंक ऋण के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और ऋण चुकता होने पर स्वतः चार्ज हट जाएगा। ई-वसूली पोर्टल के जरिए राजस्व वसूली की पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेंगी।

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Web Editor January 11, 2026
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साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

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