Dehradun, 13 August 2023। पहाड़ की महिलाएं अब सिर्फ घर और खेत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं। उत्तराखंड में लखपति दीदियों की संख्या तीन लाख का आंकड़ा पार कर 3,03,696 पहुंच गई है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी इन महिलाओं ने खेती-बाड़ी से लेकर होमस्टे, डेयरी, मशरूम और खाद्य प्रसंस्करण जैसे कामों के जरिए अपनी सालाना आय एक लाख रुपये से अधिक की है। सरकार ने अब वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1.12 लाख और महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है।
आत्मनिर्भरता का रास्ता बना स्वयं सहायता समूह
उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत नवंबर 2022 में शुरू हुई लखपति दीदी पहल ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने का जरिया बन रही है। महिलाओं को प्रशिक्षण, ऋण, अनुदान और बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। नतीजा यह है कि कई महिलाएं पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़कर छोटे कारोबार और उद्यम खड़े कर रही हैं।
मिलेट से होमस्टे तक, कमाई के नए मॉडल
महिलाओं ने जैविक खेती, खाद्य प्रसंस्करण, मसाला निर्माण, हस्तशिल्प, डेयरी-पशुपालन, मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन को आय का माध्यम बनाया है। पर्यटन क्षेत्रों में होमस्टे भी ग्रामीण महिलाओं के लिए कमाई का अहम जरिया बन रहे हैं। वहीं स्थानीय उत्पादों और मिलेट की मांग बढ़ने से महिला समूह बेकरी और अन्य वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार कर बाजार में उतार रहे हैं।
गांव से बाजार तक पहुंचा पहाड़ का उत्पाद
महिला समूहों के उत्पादों को बाजार देने के लिए प्रदेश में 24 ग्रोथ सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और 17 सरस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। सरस मेलों के जरिए स्थानीय उत्पादों को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाओं को केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि बिक्री और बाजार की समझ भी मिल रही है।
‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ने दिया ब्रांड का सहारा
स्थानीय उत्पादों को पहचान देने में ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ अहम भूमिका निभा रहा है। बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और गुणवत्ता के जरिए पहाड़ के उत्पाद बड़े शहरों और देश के प्रमुख बाजारों तक पहुंच रहे हैं। इससे महिला समूहों के उत्पादों की बाजार क्षमता बढ़ी है और आमदनी के नए अवसर बने हैं।
5.19 लाख महिलाएं आजीविका मिशन से जुड़ीं
प्रदेश के 13 जिलों के 95 ब्लॉकों में 5,19,943 महिलाएं आजीविका मिशन से जुड़ी हैं। इनके लिए 70,767 स्वयं सहायता समूह, 8,179 ग्राम संगठन और 615 क्लस्टर लेवल फेडरेशन गठित किए गए हैं। सरकार का फोकस अब इन समूहों को स्वरोजगार के साथ बाजार और वित्तीय अवसरों से जोड़ने पर है।
महिला स्वावलंबन को बढ़ावा देने के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण समेत कई पहल की गई हैं। मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार, सशक्त बहना, ड्रोन दीदी, सोलर सखी, सतत आजीविका मिशन और उद्यमशाला जैसी योजनाएं भी महिलाओं को रोजगार व स्वरोजगार से जोड़ रही हैं।
कोट
“मातृशक्ति उत्तराखंड की आर्थिक और सामाजिक क्रांति की सबसे बड़ी संवाहक है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि राज्य के विकास में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।”
— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड




