Dehradun, 07 july 2026। किसानों की आय बढ़ाने और सहकारिता को मजबूत करने के लिए जारी सरकारी योजनाओं में करोड़ों रुपये के दुरुपयोग के आरोपों ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सहकारिता विभाग ने नेशनल फेडरेशन ऑफ फार्मर्स प्रोक्योरमेंट, प्रोसेसिंग एंड रिटेलिंग कोऑपरेटिव ऑफ इंडिया लिमिटेड (नेकॉफ) के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकारी धन के कथित गबन और धोखाधड़ी के आरोपों में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जबकि संस्था को पूरे देश में ब्लैकलिस्ट करने और सरकारी धन की वसूली की कार्रवाई भी तेज कर दी गई है।
टिहरी गढ़वाल की मौगी दीर्घाकार बहुउद्देशीय सहकारी समिति की 70 एकड़ संयुक्त सहकारी खेती परियोजना के लिए स्वीकृत 1.28 करोड़ रुपये में से 71.90 लाख रुपये नेकॉफ को हैंडहोल्डिंग एजेंसी के रूप में दिए गए थे। आरोप है कि पांच वर्ष गुजरने के बावजूद न तो परियोजना धरातल पर उतरी और न ही सरकारी धन लौटाया गया। नतीजतन किसानों को योजना का कोई लाभ नहीं मिला, जबकि सरकारी राशि पर ब्याज का बोझ लगातार बढ़ता रहा।
जांच में ई-एमसीपी योजना के तहत भी बड़ा वित्तीय खेल सामने आया है। आरोप है कि प्रदेश की नौ सहकारी समितियों से प्राप्त कुल 75.82 लाख रुपये के सरकारी धन के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। विभाग का कहना है कि बार-बार नोटिस और पत्राचार के बावजूद संस्था की ओर से केवल आश्वासन दिए गए।
अब नोडल अधिकारी ने नेहरू कॉलोनी थाने में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराने के लिए तहरीर दे दी है। पुलिस कानूनी कार्रवाई में जुट गई है। विभाग का स्पष्ट संदेश है कि सरकारी धन के दुरुपयोग और किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
बयान
आनंद शुक्ल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना ने कहा, “नेकॉफ पर सरकारी धन के दुरुपयोग और धोखाधड़ी के मामले में मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की गई है। संस्था को देशभर में ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।”




