Dehradun, 12 july 2026 । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे के दौरान उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना वैश्विक मंच पर चर्चा का विषय बन गई। ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विशेष उल्लेख किया और इसे श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ आधुनिक भारत के मजबूत आधारभूत ढांचे का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री के इस उल्लेख के बाद न्यूजीलैंड सहित विभिन्न देशों में बसे सिख समुदाय के बीच हेमकुंड साहिब रोपवे को लेकर नई उत्सुकता देखने को मिली।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच स्थित श्री हेमकुंड साहिब दुनिया भर के सिख श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु कठिन पैदल यात्रा कर यहां पहुंचते हैं, लेकिन दुर्गम रास्ता, खराब मौसम और अधिक ऊंचाई के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए यात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस कठिनाई को कम करने के लिए रोपवे परियोजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है, जिससे यात्रा सुरक्षित, सुगम और कम समय में पूरी हो सकेगी।
प्रधानमंत्री के संबोधन ने उत्तराखंड की इस परियोजना को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य की धार्मिक पर्यटन क्षमता को नया विस्तार मिलेगा और विदेशों में बसे श्रद्धालुओं का उत्तराखंड से जुड़ाव भी और मजबूत होगा।
राज्य सरकार भी चारधाम सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सड़क, रोपवे और अन्य आधुनिक परिवहन सुविधाओं का लगातार विस्तार कर रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा विदेशी धरती पर हेमकुंड रोपवे का उल्लेख उत्तराखंड के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
बॉक्स: धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार
हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना पूरी होने के बाद न केवल श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प और स्वरोजगार को इससे सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
बॉक्स: साहिबजादों के बलिदान को किया नमन
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान को भी श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने सिख परंपरा के त्याग और वीरता को भारत की अमूल्य धरोहर बताया, जिससे प्रवासी सिख समुदाय भावनात्मक रूप से जुड़ता दिखाई दिया।
बॉक्स: हेमकुंड रोपवे परियोजना एक नजर में
गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 12.4 किलोमीटर लंबा रोपवे।
परियोजना पर लगभग 2,730.13 करोड़ रुपये की लागत।
पीपीपी मॉडल पर विकसित की जा रही परियोजना।
वर्तमान में लगभग 9 घंटे की यात्रा घटकर करीब 45 मिनट में पूरी हो सकेगी।
बुजुर्ग, दिव्यांग और महिलाओं के लिए यात्रा पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक होगी।
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