Dehradun, 24 October2026। उत्तराखंड में प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण और सूखते जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए अब वैज्ञानिक आधार पर काम किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश का स्प्रिंग एटलस तैयार किया जा रहा है। जनवरी से अब तक राज्य के 11 जिलों में 46,358 जलस्रोतों का सर्वे पूरा किया जा चुका है। जलस्रोतों की गणना का यह अभियान दिसंबर तक जारी रहेगा। सर्वे पूरा होने के बाद जुटाए गए आंकड़ों के विश्लेषण से जलस्रोतों की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाएगा। इसके आधार पर संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए क्षेत्रवार कार्ययोजना बनाई जाएगी।
हिमालयी राज्य उत्तराखंड में प्राकृतिक जलस्रोत ग्रामीण जीवन का अहम हिस्सा हैं। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बड़ी आबादी नौलों, धारों और अन्य प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर है। लेकिन कई क्षेत्रों में इन जलस्रोतों का जलस्तर और पानी का प्रवाह लगातार घटने की समस्या सामने आ रही है। कुछ स्रोत पूरी तरह सूख भी चुके हैं। ऐसे में स्प्रिंग एटलस के जरिए जलस्रोतों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने की पहल की गई है, ताकि संरक्षण के प्रयासों को स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाया जा सके।
सक्रिय और सूखे जलस्रोतों का भी दर्ज होगा रिकॉर्ड
स्प्रिंग एटलस तैयार करने के लिए केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के निर्देशों के तहत लघु सिंचाई विभाग की ओर से सर्वे कराया जा रहा है। इसमें प्रत्येक जलस्रोत की भौगोलिक स्थिति, अक्षांश-देशांतर, पानी की उपलब्धता और अन्य जरूरी जानकारियां एकत्र की जा रही हैं। जलस्रोतों की तस्वीरें भी मंत्रालय के पोर्टल पर अपलोड की जा रही हैं।
इस सर्वे की खास बात यह है कि इसमें केवल वर्तमान में पानी देने वाले स्रोतों को ही शामिल नहीं किया जा रहा, बल्कि पूरी तरह सूख चुके जलस्रोतों का विवरण भी दर्ज किया जा रहा है। इससे उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां जलस्रोतों की स्थिति बेहतर है और जहां पानी का प्रवाह घटने या स्रोत के पूरी तरह सूखने का खतरा अधिक है।
आंकड़ों के आधार पर तय होगी संरक्षण की प्राथमिकता
लघु सिंचाई विभाग के विभागाध्यक्ष बीके तिवारी के अनुसार, प्रदेश में जलस्रोतों की गणना जिलेवार की जा रही है। सर्वे से प्राप्त जानकारी के आधार पर स्प्रिंग एटलस तैयार होगा। इससे जलस्रोतों की मौजूदा स्थिति का आकलन करने और संरक्षण से जुड़े कार्यों की प्राथमिकता तय करने में मदद मिलेगी।
आंकड़ों के विश्लेषण के बाद संवेदनशील क्षेत्रों में जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए विशेष प्रयास किए जा सकेंगे। साथ ही, उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार करने और योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में भी सहायता मिलेगी।
दिसंबर तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद तैयार होने वाला स्प्रिंग एटलस प्रदेश के प्राकृतिक जलस्रोतों की स्थिति समझने, पानी की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों की पहचान करने और उनके दीर्घकालिक संरक्षण के लिए योजनाएं बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




