Modern Three-Aspect Railway Signaling System to Improve Safety in Uttarakhand
देहरादून, 10 Feburary 2026। उत्तराखंड में रेल संचालन को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में भारतीय रेलवे ने सिग्नलिंग आधुनिकीकरण कार्यक्रम को तेज कर दिया है। इसके तहत छोटे रेलवे स्टेशनों और लेवल क्रॉसिंग पर लंबे समय से प्रचलित टू-आस्पेक्ट सिग्नल सिस्टम को हटाकर आधुनिक थ्री-आस्पेक्ट सिग्नल लगाए जा रहे हैं। इस बदलाव से रेल सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राज्य के कई छोटे स्टेशनों और रेलवे फाटकों पर अब तक केवल लाल और हरी बत्ती वाले टू-आस्पेक्ट सिग्नल कार्यरत थे। इस व्यवस्था में लोको पायलट को खतरे की जानकारी तब मिलती थी, जब ट्रेन सिग्नल के काफी नजदीक पहुंच जाती थी। नई व्यवस्था में लगाए जा रहे थ्री-आस्पेक्ट सिग्नल में लाल, पीली और हरी तीनों लाइट शामिल हैं। पीली बत्ती पहले ही चेतावनी दे देती है कि आगे सिग्नल लाल हो सकता है, जिससे लोको पायलट समय रहते गति नियंत्रित कर सकते हैं और अचानक ब्रेक लगाने की स्थिति से बचा जा सकता है।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में यह सुधार विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां कोहरा, बरसात और सीमित ट्रैक क्षमता जैसी परिस्थितियां रेल संचालन को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। देहरादून, हरिद्वार, रुड़की और काठगोदाम जैसे प्रमुख जंक्शनों के साथ-साथ आसपास के छोटे स्टेशनों पर सिग्नलिंग सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक किया जा रहा है, ताकि यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का संचालन भी सुरक्षित और सुचारू रूप से हो सके।
रेल मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। थ्री-आस्पेक्ट सिग्नलिंग और इंटरलॉकिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों से दुर्घटनाओं की संभावना में उल्लेखनीय कमी आएगी और लोको पायलट को हर स्थिति में स्पष्ट संकेत मिल सकेंगे।
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ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम भी लागू
देशभर में 6,625 रूट किलोमीटर में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम लागू किया गया है, जिससे लाइन क्षमता और सुरक्षा दोनों में वृद्धि हुई है। पावर सप्लाई, ट्रांसमिशन मीडिया और डिटेक्शन सिस्टम में रिडंडेंसी से सिग्नल फेलियर की आशंका भी कम हुई है। नियमित रखरखाव, सख्त प्रोटोकॉल और कर्मचारियों की प्रशिक्षण व्यवस्था के चलते पिछले 11 वर्षों में सिग्नलिंग फेलियर में लगभग 58 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।




