CAG Report Flags Irregularities in Namami Gange Project STPs in Uttarakhand
गैरसैंण, 11 March 2026 । गंगा को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित नमामि गंगे परियोजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की वर्ष 2025 की रिपोर्ट में राज्य में स्थापित सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) के संचालन और प्रबंधन में कई खामियों का खुलासा हुआ है। मंगलवार को यह रिपोर्ट विधानसभा में पेश की गई।
कैग की रिपोर्ट के अनुसार नमामि गंगे परियोजना के तहत राज्य में स्थापित 44 एसटीपी में से आठ संयंत्र चार वर्ष से अधिक समय तक उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आवश्यक अनुमति के बिना ही संचालित होते रहे। पर्यावरणीय अनुमति के बिना इन संयंत्रों का संचालन न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे गंगा में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्यावरणीय मानकों के अनुसार किसी भी एसटीपी को संचालन शुरू करने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद कई संयंत्र लंबे समय तक बिना वैध अनुमति के चलते रहे, जिससे पर्यावरणीय जोखिम की स्थिति बनी रही।
कैग ने यह भी पाया कि कई परियोजनाओं में संचालन और अनुरक्षण से जुड़ी जिम्मेदारियों के स्पष्ट हस्तांतरण में देरी हुई। इसके कारण कई संयंत्रों के संचालन, तकनीकी निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था प्रभावित रही, जिससे सीवेज शोधन की प्रक्रिया अपेक्षित स्तर पर प्रभावी नहीं हो सकी।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए बनाए गए ढांचे का प्रभाव तभी दिखाई देगा जब संचालन, रखरखाव और निगरानी की जिम्मेदारियां स्पष्ट हों और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
कैग ने राज्य सरकार और संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों को सुझाव दिया है कि सभी एसटीपी के लिए आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति सुनिश्चित की जाए और निर्माण कार्य पूरा होने के बाद संयंत्रों को समय पर संचालन एवं अनुरक्षण एजेंसियों को हस्तांतरित किया जाए, ताकि नमामि गंगे परियोजना के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।
बॉक्स: 18 एसटीपी जल संस्थान को नहीं सौंपे गए
लेखापरीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर एसटीपी का निर्माण पूरा होने के बावजूद उन्हें समय पर संचालन और अनुरक्षण एजेंसी को नहीं सौंपा गया। निर्माण एजेंसी उत्तराखंड जल निगम ने 18 एसटीपी को वर्षों तक उत्तराखण्ड जल संस्थान को हस्तांतरित नहीं किया। इसके कारण इन संयंत्रों के नियमित संचालन, तकनीकी निगरानी और रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय नहीं हो सकी, जिससे परियोजना के उद्देश्य प्रभावित होने की आशंका बनी रही।




