Dehradun, 03 May 2026। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। अब यात्रा मार्ग के सबसे संवेदनशील करीब 100 किलोमीटर हिस्से पर अत्याधुनिक उपग्रह आधारित निगरानी प्रणाली तैनात की जाएगी। इस हाईटेक सुरक्षा कवच के तहत इंटरफेरोमेट्रिक सिंथेटिक अपर्चर रडार (InSAR) और लिडार तकनीक की मदद से भूस्खलन, बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा।
हर वर्ष लाखों श्रद्धालु गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम की यात्रा करते हैं। बरसात के मौसम और अचानक बदलते मौसम के कारण यात्रा मार्ग पर भूस्खलन और सड़क बाधित होने की घटनाएं आम हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा मंडराता है और कई बार लोग रास्तों में फंस जाते हैं। नई निगरानी प्रणाली इन चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाएगी।
इस परियोजना को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समझौता किया है। Indian Institute of Technology Roorkee, THDC India Limited और Geological Survey of India जैसे संस्थान इस योजना में तकनीकी सहयोग दे रहे हैं। इसके साथ ही ड्रोन तकनीक का उपयोग कर विस्तृत सर्वेक्षण और डेटा संग्रह भी किया जा रहा है, जिससे जोखिम वाले क्षेत्रों की सटीक पहचान संभव हो सके।
कैसे काम करती है InSAR तकनीक
InSAR एक उन्नत सैटेलाइट तकनीक है, जो धरातल की बेहद सूक्ष्म गतिविधियों को भी पहचान सकती है। यह अंतरिक्ष से किसी क्षेत्र की बार-बार तस्वीरें लेकर उनका विश्लेषण करती है। यदि किसी पहाड़ी ढलान में धीरे-धीरे खिसकाव या दरार बनने जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो यह तकनीक पहले ही संकेत दे देती है। इससे संभावित भूस्खलन से पहले चेतावनी जारी कर समय रहते कदम उठाए जा सकते हैं।
लिडार तकनीक से बनेगा थ्रीडी नक्शा
चारधाम यात्रा मार्गों के संवेदनशील हिस्सों पर अब उपग्रह की नजर, समय से पहले मिलेगा खतरे का अलर्ट
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