
Dehradun, 02 May 2026। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में शनिवार को आयोजित फायर सेफ्टी कार्यशाला और मॉक ड्रिल के माध्यम से यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि आग जैसी आपदाओं में घबराने के बजाय सजगता, प्रशिक्षण और त्वरित कार्रवाई ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है। कार्यक्रम में फायर ब्रिगेड देहरादून की टीम ने अस्पताल के स्टाफ को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला की शुरुआत फायर ब्रिगेड देहरादून के प्रभारी राजेश कुमार के व्याख्यान से हुई। उन्होंने कहा कि आग की घटनाएं बिना चेतावनी के होती हैं, इसलिए अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थानों में सुरक्षा इंतजाम हमेशा सक्रिय और अद्यतन रहने चाहिए। उन्होंने फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, अग्निशमन यंत्र और इमरजेंसी एग्जिट की नियमित जांच को अनिवार्य बताया।
कार्यक्रम के दौरान पंप ऑपरेटर सुनील रावत ने स्टाफ को आग लगने की स्थिति में अपनाए जाने वाले ‘रेस प्रोटोकॉल’ (Rescue, Alarm, Confine, Extinguish) की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय-समय पर मॉक ड्रिल और उपकरणों के उपयोग का अभ्यास जरूरी है, ताकि आपात स्थिति में घबराहट के बजाय व्यवस्थित तरीके से कार्रवाई हो सके और नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
अस्पताल परिसर में आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान फायर ब्रिगेड की टीम ने लाइव डेमो देकर दिखाया कि आग लगने पर मरीजों को सुरक्षित कैसे निकाला जाए, भीड़ को कैसे नियंत्रित किया जाए और शुरुआती स्तर पर आग पर काबू कैसे पाया जाए। इस प्रदर्शन से नर्सिंग स्टाफ, सुरक्षा कर्मियों और अन्य कर्मचारियों को व्यावहारिक अनुभव मिला।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि आग लगने पर सबसे पहले अलार्म बजाना, फायर ब्रिगेड को तुरंत सूचना देना और सुरक्षित निकास मार्गों का उपयोग करना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह जिम्मेदारी केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि आवासीय भवनों, अपार्टमेंट्स और कार्यालयों में भी समान रूप से फायर सेफ्टी मानकों का पालन आवश्यक है।
कार्यक्रम में अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक (प्रशासन) डॉ. गौरव रतूड़ी, चिकित्सा अधीक्षक (ऑपरेशंस) डॉ. वीरेन्द्र वर्मा, चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर डॉ. अबिन पाल और फायर सेफ्टी सुपरवाइजर अनिरुद्ध सिंह सहित बड़ी संख्या में स्टाफ मौजूद रहा।
यह कार्यशाला न केवल अस्पताल स्टाफ के लिए उपयोगी साबित हुई, बल्कि यह व्यापक समाज के लिए भी एक संदेश है कि सतर्कता, नियमित प्रशिक्षण और सही संसाधनों के साथ ही आग जैसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।




