Dehradun, 31 july 2026। बार-बार मोबाइल चार्ज करने की परेशानी और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की सीमित रेंज भविष्य में काफी हद तक कम हो सकती है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के वैज्ञानिकों ने लिथियम-आयन बैटरियों की कार्यप्रणाली को लेकर ऐसी महत्वपूर्ण खोज की है, जो अगली पीढ़ी की अधिक शक्तिशाली, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाली बैटरियों के विकास का आधार बन सकती है।
यह शोध आईआईटी रुड़की के रसायन विज्ञान विभाग की प्रोफेसर स्वस्तिका बनर्जी के नेतृत्व में किया गया है। शोध को दुनिया की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Journal of the American Chemical Society में प्रकाशित किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अध्ययन ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) तकनीक में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने लिथियम-आयन बैटरी के भीतर आयनों की गति और उनके व्यवहार का गहन अध्ययन किया। टीम ने समझा कि बैटरी के अंदर लिथियम आयनों की आवाजाही किस तरह ऊर्जा के प्रवाह और बैटरी के प्रदर्शन को प्रभावित करती है। इस नई वैज्ञानिक समझ से भविष्य में ऐसी बैटरियां विकसित करने का रास्ता खुल सकता है जो तेजी से चार्ज हों, अधिक सुरक्षित हों और लंबे समय तक अपनी क्षमता बनाए रखें।
यदि इस शोध के आधार पर नई तकनीक विकसित होती है तो इसका सबसे बड़ा लाभ इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को मिलेगा। ईवी एक बार चार्ज होने पर पहले से अधिक दूरी तय कर सकेंगे, जिससे चार्जिंग स्टेशनों पर निर्भरता कम होगी। वहीं मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी लंबे समय तक बिना दोबारा चार्ज किए चल सकेंगे।
प्रो. स्वस्तिका बनर्जी ने बताया कि उनकी टीम ने बैटरी के भीतर होने वाली सूक्ष्म प्रक्रियाओं को समझने में सफलता हासिल की है। यह जानकारी भविष्य की बैटरियों के डिजाइन और प्रदर्शन को बेहतर बनाने में उपयोगी सिद्ध होगी।
शोध का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इससे सॉलिड-स्टेट बैटरियों के विकास को गति मिल सकती है। सॉलिड-स्टेट बैटरियां वर्तमान लिथियम-आयन बैटरियों की तुलना में अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं और इनमें ऊर्जा संग्रहण क्षमता भी अधिक होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही तकनीक भविष्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि मौलिक वैज्ञानिक अनुसंधान ही भविष्य की नई तकनीकों की नींव रखते हैं। उनके अनुसार यह अध्ययन ऊर्जा भंडारण तकनीक को नई दिशा देगा और वैश्विक स्तर पर बेहतर, टिकाऊ और उच्च क्षमता वाली बैटरियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे भारत को उन्नत बैटरी तकनीक के क्षेत्र में भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।




