Haridwar, 23 August2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लोकतंत्र की मजबूती, सुशासन और विकास की निरंतरता से जोड़ते हुए इसे राष्ट्रहित का महत्वपूर्ण विषय बताया। रविवार को हरिद्वार स्थित अवधूत मंडल आश्रम में संत समागम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनाव लोकतंत्र का उत्सव हैं, लेकिन लगातार चलने वाली चुनावी प्रक्रिया का असर शासन-प्रशासन और विकास कार्यों पर भी पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में अलग-अलग समय पर होने वाले लोकसभा, विधानसभा और अन्य चुनावों के कारण बार-बार आचार संहिता लागू होती है। इसका असर नई योजनाओं की घोषणा, विकास कार्यों की गति और प्रशासनिक निर्णयों पर पड़ता है। चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी, शिक्षक, पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल चुनावी दायित्वों में लगाए जाते हैं। इससे सरकारी मशीनरी का महत्वपूर्ण समय और संसाधन चुनाव प्रक्रिया में खर्च होता है।
उन्होंने कहा कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था संभव होती है तो इससे सार्वजनिक धन की बचत के साथ प्रशासनिक संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। बचाए गए समय और संसाधनों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, आधारभूत ढांचे और जनकल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित किया जा सकेगा।
धामी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है। संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करते हुए इस विषय पर सभी पक्षों के सुझावों और चिंताओं पर चर्चा होनी चाहिए। इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के हित से ऊपर उठकर शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव अनिवार्य हैं, लेकिन शासन व्यवस्था का अधिकतम समय जनसेवा और विकास के लिए इस्तेमाल होना चाहिए। बार-बार चुनावी व्यस्तता के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों की बड़ी संख्या चुनाव ड्यूटी में लगती है, जिससे विकास योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन प्रभावित होने की संभावना रहती है।
उन्होंने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प से भी जोड़ा। धामी ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को लंबे समय तक विकास की निरंतर गति बनाए रखनी होगी। प्रशासनिक क्षमता, मानव संसाधन और सार्वजनिक धन का बेहतर इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण में किया जाना आवश्यक है।
बाक्स: चुनावी व्यस्तता से मुक्त हो प्रशासन
धामी ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं, लेकिन प्रशासन का मुख्य दायित्व जनसेवा और विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन है। बार-बार चुनावी ड्यूटी में अधिकारियों-कर्मचारियों की तैनाती से सरकारी कामकाज प्रभावित हो सकता है। एक साथ चुनाव की व्यवस्था होने पर प्रशासन को लंबे समय तक विकास कार्यों पर केंद्रित रखने में मदद मिल सकती है।
बाक्स: विकसित भारत-2047 के लक्ष्य से जोड़ा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को राष्ट्रीय विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बनाया है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए संसाधनों का अधिकतम उपयोग जरूरी है। लगातार चुनावी गतिविधियों में लगने वाले समय और संसाधनों को बचाकर विकास की गति को और तेज किया जा सकता है।
बाक्स: संत समाज से जनजागरण में सहयोग की अपील
धामी ने संत-महात्माओं से ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर समाज में सकारात्मक और तथ्यात्मक संवाद बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में संत समाज ने हमेशा राष्ट्र और समाज को दिशा देने का कार्य किया है। ऐसे विषयों पर संतों का मार्गदर्शन लोगों तक जागरूकता और सही जानकारी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बार-बार चुनाव से विकास प्रभावित, एक साथ चुनाव पर हो गंभीर विचार: धामी
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