Dehradun, 23 August2026। राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए अब तकनीक को सड़क सुरक्षा की नई ढाल बनाने की तैयारी है। हाईवे पर यातायात व्यवस्था को सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस) समेत तकनीक आधारित समाधानों को व्यापक रूप से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत एआई आधारित पूर्वानुमान, डिजिटल निगरानी, उन्नत यातायात प्रबंधन, एम्बुलेंस मैपिंग और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को सड़क सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
आईटीएस के जरिए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां जोखिम कम करने के उपाय किए जा सकेंगे। सड़क पर वाहनों की आवाजाही, गति, यातायात दबाव और अन्य गतिविधियों की लगातार निगरानी से खतरनाक परिस्थितियों की पहचान पहले ही की जा सकेगी। दुर्घटना होने की स्थिति में संबंधित एजेंसियों और आपातकालीन सेवाओं तक सूचना तेजी से पहुंचाने की व्यवस्था भी मजबूत होगी।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड (एनआरएसबी) के अध्यक्ष डॉ. नितिन आर. गोकर्ण के अनुसार तकनीक आधारित प्रणालियां दुर्घटना के बाद प्रतिक्रिया समय कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। सड़क सुरक्षा के लिए देशभर में दुर्घटना संभावित शीर्ष दस स्थानों की पहचान कर उनके वैज्ञानिक प्रबंधन पर भी जोर दिया जा रहा है। टोल प्लाजा कर्मियों को प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण देने की जरूरत भी बताई गई है, ताकि हादसे के तुरंत बाद घायलों को शुरुआती सहायता मिल सके।
भविष्य की रणनीति में सुरक्षित राजमार्ग इंजीनियरिंग, गति प्रबंधन, सुरक्षित संचालन, वाणिज्यिक वाहनों की सुरक्षा, डिजिटल सुरक्षा प्रबंधन, निगरानी और निर्णय सहायता प्रणाली को एकीकृत करने की योजना है। सड़क सुरक्षा ऑडिट के माध्यम से सड़क परियोजनाओं के सुरक्षा प्रभावों की भी व्यवस्थित समीक्षा की जाएगी।
राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई दिल्ली स्थित एनएचएआई मुख्यालय में एनएचएआई और राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड की बैठक में व्यापक समीक्षा की गई। बैठक में नियमित समीक्षा और सतत सहयोग की व्यवस्था को आगे भी जारी रखने पर सहमति बनी।
बॉक्स: क्या है इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम?
इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम ऐसी तकनीकी व्यवस्था है, जिसमें सेंसर, कैमरे, जीपीएस, संचार नेटवर्क, डेटा एनालिटिक्स और एआई के जरिए यातायात की निगरानी और प्रबंधन किया जाता है। सिस्टम सड़क पर वाहनों की गति, यातायात दबाव, दुर्घटना या अन्य बाधाओं की जानकारी जुटाकर उसका विश्लेषण करता है। इसके आधार पर वाहन चालकों और संबंधित एजेंसियों को समय रहते अलर्ट दिया जा सकता है। हादसे की स्थिति में निकटतम एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं तक सूचना तेजी से पहुंचाई जा सकती है। यानी आईटीएस का लक्ष्य सिर्फ हादसे के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि संभावित खतरे की पहले पहचान कर दुर्घटना की आशंका को कम करना भी है।
बॉक्स: उत्तराखंड मौते250 से ज्यादा मौतें
विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में सड़क हादसों पर नियंत्रण बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जनवरी से अब तक प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि 878 लोग घायल हुए हैं। पहाड़ी सड़कों पर तीखे मोड़, संकरी सड़कें, मौसम और तेज रफ्तार जैसे जोखिमों को देखते हुए उत्तराखंड में भी आईटीएस जैसी तकनीक आधारित सड़क सुरक्षा व्यवस्था की उपयोगिता और बढ़ जाती है।




