By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: उत्तराखंड के सात जिलों में बढ़ा खेती का रकबा
Share
Notification Show More
Latest News
शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट
उत्तराखंड
कांग्रेस बोझ समझती है तो घर बैठने को तैयार: हरीश रावत
उत्तराखंड
अब एआई और रोबोटिक्स सीखेंगे उत्तराखंड के स्कूली बच्चे
उत्तराखंड
क्यूआर कोड से मिलेगी कुंभ की पूरी जानकारी
उत्तराखंड
चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में बनेंगे विशेष औद्योगिक पार्क: धामी
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड के सात जिलों में बढ़ा खेती का रकबा
उत्तराखंड

उत्तराखंड के सात जिलों में बढ़ा खेती का रकबा

Web Editor
Last updated: 2026/08/22 at 3:53 PM
Web Editor
Share
4 Min Read
SHARE

Dehradun, 22 August 2026। उत्तराखंड में खेती के क्षेत्रफल को लेकर सकारात्मक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। वर्ष 2022-23 और 2024-25 के आंकड़ों की तुलना में राज्य के 13 जिलों में से सात जिलों में परती भूमि का रकबा घटा है। इसका मतलब है कि लंबे समय से खेती से बाहर पड़ी जमीन का एक हिस्सा फिर कृषि उपयोग में आने लगा है। राज्य में कुल परती भूमि 2,15,982 हेक्टेयर से घटकर 2,08,085 हेक्टेयर रह गई। दो वर्षों में 7,897 हेक्टेयर परती भूमि कम होना कृषि क्षेत्र के लिए उम्मीद जगाने वाला संकेत माना जा रहा है।

सर्वाधिक कमी पौड़ी में दर्ज

परती भूमि में सबसे बड़ी कमी पौड़ी जिले में दर्ज की गई। वर्ष 2022-23 में यहां 61,122 हेक्टेयर भूमि परती थी, जो 2024-25 में घटकर 55,320 हेक्टेयर रह गई। इस तरह 5,802 हेक्टेयर भूमि दोबारा कृषि उपयोग में आने के संकेत मिले हैं। हरिद्वार में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई, जहां परती भूमि 12,624 से घटकर 9,672 हेक्टेयर रह गई। यानी यहां 2,952 हेक्टेयर की कमी आई।

टिहरी में परती भूमि 25,183 से घटकर 22,701 हेक्टेयर, चंपावत में 16,965 से घटकर 14,869 हेक्टेयर और देहरादून में 23,947 से घटकर 22,884 हेक्टेयर रह गई। पिथौरागढ़ में यह आंकड़ा 15,187 से घटकर 14,703 हेक्टेयर और अल्मोड़ा में 26,854 से घटकर 26,447 हेक्टेयर हुआ है।

पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन, सिंचाई की सीमित सुविधा, बढ़ती कृषि लागत और जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान के कारण कृषि भूमि के परती रहने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। ऐसे में सात जिलों में परती भूमि का घटना महत्वपूर्ण बदलाव है। हालांकि अब चुनौती इन जमीनों को लगातार खेती के उपयोग में बनाए रखने की है। इसके लिए सिंचाई सुविधाओं, बाजार, फसल सुरक्षा और किसानों को लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी होगा।

छह जिलों में बढ़ी परती जमीन

राज्य के सभी जिलों में परती भूमि घटने का रुझान नहीं रहा। छह जिलों में इसका रकबा बढ़ा है। ऊधम सिंह नगर में परती भूमि 9,487 से बढ़कर 13,231 हेक्टेयर हो गई, यानी 3,744 हेक्टेयर की वृद्धि हुई। चमोली में यह 3,880 से बढ़कर 5,376 हेक्टेयर और रुद्रप्रयाग में 1,806 से बढ़कर 2,558 हेक्टेयर हो गई।

बागेश्वर में परती भूमि 4,402 से बढ़कर 5,024 हेक्टेयर, नैनीताल में 10,175 से बढ़कर 10,700 हेक्टेयर और उत्तरकाशी में 4,350 से बढ़कर 4,600 हेक्टेयर दर्ज हुई।

मिलेट और औद्यानिकी से मिल रहा सहारा

कृषि निदेशक दिनेश कुमार के अनुसार, मिलेट नीति के तहत मंडुवा समेत अन्य मोटे अनाजों का क्षेत्रफल बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ सब्जी, चाय और औद्यानिकी गतिविधियों के लिए भी परती भूमि का उपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि परती भूमि में आई कमी इस बात का संकेत है कि किसान दोबारा खेती की ओर लौट रहे हैं। यदि सिंचाई, बाजार और फसल सुरक्षा जैसी सुविधाओं को और मजबूत किया जाए तो आने वाले वर्षों में यह रुझान और बेहतर हो सकता है।

You Might Also Like

शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट

कांग्रेस बोझ समझती है तो घर बैठने को तैयार: हरीश रावत

अब एआई और रोबोटिक्स सीखेंगे उत्तराखंड के स्कूली बच्चे

क्यूआर कोड से मिलेगी कुंभ की पूरी जानकारी

चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में बनेंगे विशेष औद्योगिक पार्क: धामी

TAGGED: Uttarakhand: Farming Area Rises as Fallow Land Declines
Web Editor August 22, 2026
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article देवभूमि का मूल स्वरूप बनाए रखना प्राथमिकता: धामी
Next Article ग्लेशियर झीलों के लिहाज से पिथौरागढ़ सर्वाधिक संवेदनशील
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट
उत्तराखंड October 10, 2026
कांग्रेस बोझ समझती है तो घर बैठने को तैयार: हरीश रावत
उत्तराखंड October 10, 2026
अब एआई और रोबोटिक्स सीखेंगे उत्तराखंड के स्कूली बच्चे
उत्तराखंड October 9, 2026
क्यूआर कोड से मिलेगी कुंभ की पूरी जानकारी
उत्तराखंड October 8, 2026

Recent Posts

  • शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट
  • कांग्रेस बोझ समझती है तो घर बैठने को तैयार: हरीश रावत
  • अब एआई और रोबोटिक्स सीखेंगे उत्तराखंड के स्कूली बच्चे
  • क्यूआर कोड से मिलेगी कुंभ की पूरी जानकारी
  • चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में बनेंगे विशेष औद्योगिक पार्क: धामी

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • पहाड़ के स्वाद ने पार किया छह करोड़ का आंकड़ा, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ बना नया बाजार (8,743)
  • मक्‍की की वजह से पर्यटन के नक्‍शे पर आया यह गांव (7,670)
  • राज्य में 12 पी माइनस थ्री पोलिंग स्टेशन बनाए गए (7,623)
  • 300 रुपये के लिए वृद्ध दंपती समेत तीन को पेचकस से गोदा, मौत (6,943)
  • अब एआई और रोबोटिक्स सीखेंगे उत्तराखंड के स्कूली बच्चे (6,873)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?