Haridwar, 22 August 2026। उत्तराखंड की धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और देवभूमि के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए विकास को गति देना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, लेकिन इसके साथ उनकी पवित्रता, परंपरा और सांस्कृतिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखा जाएगा। तीर्थस्थलों के पुनर्निर्माण, मंदिर माला मिशन और रोपवे परियोजनाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
शनिवार को मुख्यमंत्री ने सप्तसरोवर रोड, भूपतवाला स्थित श्री ब्रह्म निवास आश्रम में सतगुरु लाल दास महाराज के 51वें निर्वाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उन्होंने सतगुरु लाल दास महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर आध्यात्मिकता, सेवा, सत्य और भक्ति का संदेश दिया। उनकी शिक्षाओं ने समाज को जोड़ने के साथ मानव सेवा को सर्वोच्च धर्म मानने की प्रेरणा दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज ने हमेशा धर्म, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संतों और आचार्यों का मार्गदर्शन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ बेहतर राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि देश में सनातन धार्मिक संस्कृति के पुनर्जागरण का स्वर्णिम काल चल रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी कॉरिडोर और उज्जैन महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रोपवे परियोजनाओं के निर्माण से कठिन पर्वतीय तीर्थ यात्राएं आसान होंगी और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। सरकार का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी मजबूत करना है।
कार्यक्रम में सतगुरु चेतनानंद जी भूरी वाले ने बताया कि संस्था पिछले 57 वर्षों से अखंड भोजन और गरीबों की सेवा का कार्य कर रही है। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और आपदा प्रबंधन उपाध्यक्ष विनय रोहिल्ला ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
गंगा से शारदा तट तक हो रहा विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार में गंगा कॉरिडोर, ऋषिकेश कॉरिडोर, आस्था पथ के साथ शारदा और यमुना तटों के विकास की योजनाओं पर भी काम आगे बढ़ रहा है। सरकार का प्रयास है कि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और आध्यात्मिक वातावरण मिले। इसके साथ ही देवभूमि के मूल स्वरूप और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए अवैध निर्माण तथा संस्कृति और सामाजिक वातावरण को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
शोध और अनुसंधान को दिया जा रहा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून में हिंदू अध्ययन केंद्र स्थापित किया गया है। यहां धर्म और संस्कृति के साथ ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन, शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार की धरती से उत्तराखंड के दशक की बात कही थी। सरकार धर्म, विकास, नवाचार और ज्ञान के क्षेत्र में प्रदेश को आत्मनिर्भर तथा देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, राज्य मंत्री शोभाराम प्रजापति, ओमप्रकाश जमदग्नि, प्रदेश सह-मीडिया प्रभारी विकास तिवारी, आशु चौधरी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेंद्र डोभाल, एसपी ट्रैफिक निशा यादव, अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट हर गिरी, उप जिलाधिकारी योगेश मेहरा, सचिव एचआरडीए प्रत्यूष सिंह सहित साधु-संत और विभिन्न प्रदेशों से आए भक्तगण मौजूद रहे।
देवभूमि का मूल स्वरूप बनाए रखना प्राथमिकता: धामी
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