By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: देवभूमि का मूल स्वरूप बनाए रखना प्राथमिकता: धामी
Share
Notification Show More
Latest News
ग्लेशियर झीलों के लिहाज से पिथौरागढ़ सर्वाधिक संवेदनशील
उत्तराखंड
उत्तराखंड के सात जिलों में बढ़ा खेती का रकबा
उत्तराखंड
देवभूमि का मूल स्वरूप बनाए रखना प्राथमिकता: धामी
उत्तराखंड
भारत-नेपाल सीमा पर अतिक्रमण हटेगा, सीमा स्तंभों की होगी निगरानी
उत्तराखंड
मानसून में रणनीति बदल रहा गुलदार, गर्मियों में जंगल में बाघ का खतरा ज्यादा 
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > देवभूमि का मूल स्वरूप बनाए रखना प्राथमिकता: धामी
उत्तराखंड

देवभूमि का मूल स्वरूप बनाए रखना प्राथमिकता: धामी

Web Editor
Last updated: 2026/08/22 at 3:47 PM
Web Editor
Share
4 Min Read
SHARE

Haridwar,  22 August 2026। उत्तराखंड की धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और देवभूमि के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए विकास को गति देना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, लेकिन इसके साथ उनकी पवित्रता, परंपरा और सांस्कृतिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखा जाएगा। तीर्थस्थलों के पुनर्निर्माण, मंदिर माला मिशन और रोपवे परियोजनाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
शनिवार को मुख्यमंत्री ने सप्तसरोवर रोड, भूपतवाला स्थित श्री ब्रह्म निवास आश्रम में सतगुरु लाल दास महाराज के 51वें निर्वाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उन्होंने सतगुरु लाल दास महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर आध्यात्मिकता, सेवा, सत्य और भक्ति का संदेश दिया। उनकी शिक्षाओं ने समाज को जोड़ने के साथ मानव सेवा को सर्वोच्च धर्म मानने की प्रेरणा दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज ने हमेशा धर्म, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संतों और आचार्यों का मार्गदर्शन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ बेहतर राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि देश में सनातन धार्मिक संस्कृति के पुनर्जागरण का स्वर्णिम काल चल रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी कॉरिडोर और उज्जैन महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रोपवे परियोजनाओं के निर्माण से कठिन पर्वतीय तीर्थ यात्राएं आसान होंगी और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। सरकार का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी मजबूत करना है।
कार्यक्रम में सतगुरु चेतनानंद जी भूरी वाले ने बताया कि संस्था पिछले 57 वर्षों से अखंड भोजन और गरीबों की सेवा का कार्य कर रही है। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और आपदा प्रबंधन उपाध्यक्ष विनय रोहिल्ला ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
गंगा से शारदा तट तक हो रहा विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार में गंगा कॉरिडोर, ऋषिकेश कॉरिडोर, आस्था पथ के साथ शारदा और यमुना तटों के विकास की योजनाओं पर भी काम आगे बढ़ रहा है। सरकार का प्रयास है कि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और आध्यात्मिक वातावरण मिले। इसके साथ ही देवभूमि के मूल स्वरूप और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए अवैध निर्माण तथा संस्कृति और सामाजिक वातावरण को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
शोध और अनुसंधान को दिया जा रहा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून में हिंदू अध्ययन केंद्र स्थापित किया गया है। यहां धर्म और संस्कृति के साथ ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन, शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार की धरती से उत्तराखंड के दशक की बात कही थी। सरकार धर्म, विकास, नवाचार और ज्ञान के क्षेत्र में प्रदेश को आत्मनिर्भर तथा देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, राज्य मंत्री शोभाराम प्रजापति, ओमप्रकाश जमदग्नि, प्रदेश सह-मीडिया प्रभारी विकास तिवारी, आशु चौधरी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेंद्र डोभाल, एसपी ट्रैफिक निशा यादव, अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट हर गिरी, उप जिलाधिकारी योगेश मेहरा, सचिव एचआरडीए प्रत्यूष सिंह सहित साधु-संत और विभिन्न प्रदेशों से आए भक्तगण मौजूद रहे।

You Might Also Like

ग्लेशियर झीलों के लिहाज से पिथौरागढ़ सर्वाधिक संवेदनशील

उत्तराखंड के सात जिलों में बढ़ा खेती का रकबा

भारत-नेपाल सीमा पर अतिक्रमण हटेगा, सीमा स्तंभों की होगी निगरानी

मानसून में रणनीति बदल रहा गुलदार, गर्मियों में जंगल में बाघ का खतरा ज्यादा 

दून में खुलेगा राज्य स्तरीय विपणन केंद्र, पहाड़ी उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार

TAGGED: Devbhoomi’s Original Identity Priority: CM Pushkar Singh Dhami
Web Editor August 22, 2026
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article भारत-नेपाल सीमा पर अतिक्रमण हटेगा, सीमा स्तंभों की होगी निगरानी
Next Article उत्तराखंड के सात जिलों में बढ़ा खेती का रकबा
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

ग्लेशियर झीलों के लिहाज से पिथौरागढ़ सर्वाधिक संवेदनशील
उत्तराखंड August 22, 2026
उत्तराखंड के सात जिलों में बढ़ा खेती का रकबा
उत्तराखंड August 22, 2026
देवभूमि का मूल स्वरूप बनाए रखना प्राथमिकता: धामी
उत्तराखंड August 22, 2026
भारत-नेपाल सीमा पर अतिक्रमण हटेगा, सीमा स्तंभों की होगी निगरानी
उत्तराखंड August 21, 2026

Recent Posts

  • ग्लेशियर झीलों के लिहाज से पिथौरागढ़ सर्वाधिक संवेदनशील
  • उत्तराखंड के सात जिलों में बढ़ा खेती का रकबा
  • देवभूमि का मूल स्वरूप बनाए रखना प्राथमिकता: धामी
  • भारत-नेपाल सीमा पर अतिक्रमण हटेगा, सीमा स्तंभों की होगी निगरानी
  • मानसून में रणनीति बदल रहा गुलदार, गर्मियों में जंगल में बाघ का खतरा ज्यादा 

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • मक्‍की की वजह से पर्यटन के नक्‍शे पर आया यह गांव (7,030)
  • राज्य में 12 पी माइनस थ्री पोलिंग स्टेशन बनाए गए (6,898)
  • टिहरी राजपरिवार के पास 200 करोड से अधिक की संपत्ति (5,409)
  • कम मतदान प्रतिशत वाले बूथों पर जनजागरूकता में जुटा चुनाव आयोग (5,298)
  • प्रधानमंत्री माेदी और गृह मंत्री शाह जल्‍द आएंगे उत्‍तराखंड (5,098)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?