Dehradun, 23 August 2026। पहाड़ के खेतों में झंगोरे की खेती अब कम बीज और कम लागत में ज्यादा उत्पादन का जरिया बन सकती है। उत्तराखंड कृषि विभाग ने बर्नयार्ड मिलेट यानी झंगोरे की उत्पादकता बढ़ाने के लिए सिस्टम ऑफ मिलेट इंटेंसिफिकेशन (एसएमआई) पद्धति को अपनाया है। इस तकनीक में एक एकड़ खेत के लिए महज करीब 150 ग्राम बीज से नर्सरी तैयार की जाएगी और 15 से 21 दिन की पौध को खेत में निश्चित दूरी पर रोपा जाएगा। कृषि विभाग को उम्मीद है कि इससे पारंपरिक खेती की तुलना में उत्पादन दो से तीन गुना तक बढ़ सकता है। उत्तरकाशी से शुरू हुआ यह प्रयोग सफल रहा तो पहाड़ी किसानों के लिए झंगोरे की खेती नई आर्थिक संभावनाओं का रास्ता खोल सकती है।
नर्सरी में तैयार होगी पौध, फिर खेत में रोपाई
एसएमआई पद्धति पारंपरिक तरीके से अलग है। सामान्य तौर पर किसान खेत में सीधे बीज की बुआई करते हैं, लेकिन नई तकनीक में पहले नर्सरी तैयार की जाएगी। करीब 15 से 21 दिन बाद तैयार पौध को खेत में निर्धारित दूरी पर रोपा जाएगा। पौधों के बीच लगभग 10×12 इंच की दूरी रखी जाएगी। इससे पौधों को पर्याप्त जगह, पानी और पोषक तत्व मिलने के साथ जड़ों के बेहतर विकास की संभावना बढ़ेगी।
कृषि निदेशक दिनेश कुमार के अनुसार एसएमआई तकनीक से मिलेट की पैदावार दो से तीन गुना तक बढ़ सकती है। साथ ही खेती की लागत कम करने पर भी जोर रहेगा। इसमें रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर जैविक खाद और बेहतर कृषि प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा। मिट्टी में हवा का संचार बेहतर होने और जड़ों के मजबूत विकास से फसल की सूखा सहने की क्षमता भी बढ़ने की उम्मीद है।
एमएसपी का इंतजार
झंगोरे की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने में न्यूनतम समर्थन मूल्य का अभाव बड़ी चुनौती है। कृषि विभाग इसे एमएसपी के दायरे में लाने के लिए वित्त विभाग से बातचीत कर रहा है। प्रस्तावित समर्थन मूल्य कम से कम 52.5 रुपये प्रति किलोग्राम रखने की बात कही गई है। मंजूरी मिलने पर किसानों को बाजार मूल्य में सुरक्षा मिलेगी और झंगोरे की खेती के प्रति उनका भरोसा बढ़ सकता है।
बाक्स : बच्चों की थाली में भी पहुंचेगा झंगोरा
सरकार बर्नयार्ड मिलेट से तैयार व्यंजनों को स्कूलों के भोजन में शामिल करने की योजना पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय मिलेट की खपत बढ़ाना है। मिलेट उत्पादक श्वेता बंधानी के अनुसार सांवा फाइबर, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है। इसके नियमित सेवन को बेहतर रक्त शर्करा नियंत्रण और पाचन स्वास्थ्य से भी जोड़ा जाता है।
बाक्स : 28,250 हेक्टेयर में होती है खेती
उत्तराखंड बर्नयार्ड मिलेट उत्पादन वाले प्रमुख राज्यों में शामिल है। कृषि विभाग के अनुसार राज्य में करीब 28,250 हेक्टेयर क्षेत्र में झंगोरे की खेती होती है और सालाना उत्पादन लगभग 40,200 मीट्रिक टन है। ऐसे में एसएमआई जैसी तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो कम बीज में ज्यादा उत्पादन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और पहाड़ी खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।




