Dehradun, 26 August 2026 । उत्तराखंड में उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन का लाभ देने की प्रक्रिया अब चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। सरकार ने इसके लिए तीन चरण तय किए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में उपनल के अलावा सहकारिता, परिवहन, स्वास्थ्य और कार्मिक विभाग से जुड़े कुल 17 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने बताया कि उपनल कर्मियों की सेवा अवधि में आए कृत्रिम ब्रेक को भी सरकार ने निर्णय में शामिल किया है। सैनिक कल्याण विभाग के 20 फरवरी 2026 के शासनादेश में निर्धारित निरंतर नियुक्ति की शर्त को भी शिथिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि 1 जनवरी 2016 से पहले नियुक्त और वर्तमान में भी सेवा में कार्यरत उपनल कर्मचारियों को तीन फरवरी 2026 के शासनादेश के तहत न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते का लाभ दिया जाएगा। वहीं, न्यायालय के आदेशों के क्रम में प्रत्यक्ष अनुबंध पर कार्यरत रहे पूर्व उपनल कर्मियों को भी वेतनमान का न्यूनतम और परिवर्तनीय महंगाई भत्ता देने का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने निगमों, परिषदों और स्वायत्तशासी संस्थाओं के कर्मचारियों के लिए भी रास्ता साफ किया है। तिवारी के अनुसार, न्यायालय के आदेशों और सैनिक कल्याण विभाग के निर्देशों में निर्धारित शर्तों के अधीन ये संस्थाएं अपने स्तर पर समान वेतन के संबंध में निर्णय ले सकेंगी।
तीन चरणों में आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
पहले चरण में 1 जनवरी 2016 से पहले नियुक्त उपनल कर्मचारियों को शामिल किया गया है और इसकी प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है। दूसरे चरण में 1 जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 के बीच नियुक्त कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन का लाभ देने पर विचार किया जाएगा। इस चरण की प्रक्रिया 9 नवंबर 2026 से शुरू होगी।
तीसरे चरण में 13 नवंबर 2018 से 15 अक्टूबर 2024 के बीच नियुक्त उपनल कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा। इस चरण के लिए कार्रवाई 1 अप्रैल 2027 से शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
स्वीकृत पदों पर पहले वरिष्ठता के आधार पर समायोजन
कैबिनेट ने स्वीकृत पदों की तुलना में अधिक संख्या में उपनल कर्मियों के कार्यरत होने की स्थिति से निपटने के लिए भी व्यवस्था तय की है। ऐसे मामलों में कर्मचारियों को उनकी नियुक्ति तिथि के आधार पर वरीयता दी जाएगी। पहले नियुक्त कर्मचारियों को उपलब्ध स्वीकृत पदों के सापेक्ष समायोजित किया जाएगा।
यदि स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं होते हैं तो अधिसंख्य पदों के सृजन अथवा समायोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद शेष कर्मचारियों को उनकी न्यूनतम शैक्षिक योग्यता के आधार पर उसी विभाग में संवर्ग के प्रारंभिक यानी सीधी भर्ती वाले पद के वेतनमान पर कार्योजित करने का विकल्प रखा गया है।
ऐसे मामलों में शीघ्र निर्णय लेने के लिए शासन स्तर पर अलग समिति गठित की जाएगी। सरकार के इस फैसले से लंबे समय से समान कार्य समान वेतन की मांग कर रहे उपनल कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से राहत मिलने की उम्मीद है।




