वीएल मंडुआ 400 ने कम बारिश में भी दिया बेहतर उत्पादन, 100 दिन से कम में पककर होती है तैयार
Almora, 17 October 2026। उत्तराखंड के पहाड़ों में विकसित मंडुआ की एक खास किस्म अब कर्नाटक के किसानों के बीच अपनी पहचान बना रही है। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस), अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों की विकसित वीएल मंडुआ 400 किस्म ने कम बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देकर किसानों का भरोसा जीता है। कम समय में पकने, अच्छी उपज और कैल्शियम से भरपूर होने के कारण यह किस्म खेती के साथ पोषण के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।राष्ट्रीय बीज निगम, दावणगेरे के अनुसार, चालू खरीफ सीजन में कर्नाटक में करीब 70 हेक्टेयर क्षेत्र में इस किस्म के बीज का उत्पादन किया गया। इसमें किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े 92 लघु एवं सीमांत किसानों ने भाग लिया। किसानों तक इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए सामान्य बिक्री के माध्यम से करीब 500 क्विंटल और डीलरों के जरिए 150 क्विंटल बीज बेचा गया। कम बारिश के बावजूद फसल के अच्छे प्रदर्शन से किसान संतुष्ट हैं।
संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत के अनुसार, कम अवधि में पकने, बेहतर उपज और अधिक कैल्शियम जैसी खूबियां इस किस्म को किसानों के लिए उपयोगी बनाती हैं। किसानों को इसके फायदे और खेतों में प्रदर्शन की जानकारी देने के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ने कर्नाटक के विजयनगर जिले के उज्जैनी गांव में किसान क्षेत्र दिवस आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है।
100 दिन से भी कम में तैयार होती है फसल
वीएल मंडुआ 400 की सबसे बड़ी खासियत इसका कम समय में पककर तैयार होना है। इसकी बालियां सघन होती हैं और उत्पादन क्षमता भी अच्छी है। वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों के लिए यह किस्म विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है। कम अवधि में फसल तैयार होने से मौसम के अंतिम चरण में बारिश की कमी के कारण होने वाले नुकसान का जोखिम घटाने में मदद मिल सकती है। इससे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किसानों को खेती का एक बेहतर विकल्प मिलता है।
मानक किस्म से 11.5 प्रतिशत अधिक उपज
अखिल भारतीय समन्वित लघु धान्य अनुसंधान परियोजना के तहत देश के 40 स्थानों पर किए गए परीक्षणों में वीएल मंडुआ 400 की औसत उपज 34.77 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। वहीं, मानक किस्म वीएल मंडुआ 376 की औसत उपज 31.11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। इस तरह नई किस्म ने मानक किस्म के मुकाबले 11.5 प्रतिशत अधिक औसत उपज दी। परीक्षणों के नतीजे इसकी बेहतर उत्पादन क्षमता को दर्शाते हैं।
कैल्शियम का भी अच्छा स्रोत
वीएल मंडुआ 400 पोषण के लिहाज से भी खास है। इसके 100 ग्राम दानों में 399.5 मिलीग्राम कैल्शियम पाया गया है। ऐसे में यह किस्म किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ लोगों को पौष्टिक अनाज उपलब्ध कराने में भी योगदान दे सकती है। उत्तराखंड में विकसित इस मंडुआ की कर्नाटक में बढ़ती मांग पर्वतीय कृषि अनुसंधान की उपयोगिता और मोटे अनाज की संभावनाओं को भी सामने लाती है।




