Dehradun, 08 November 2026: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देशवासियों के घरों में दीपावली के दीये सैनिकों के त्याग, साहस और समर्पण के कारण रोशन हैं। जब लोग अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाते हैं, उस समय देश के जवान सीमाओं पर डटे रहकर राष्ट्र की सुरक्षा में जुटे रहते हैं। सैनिकों का यही समर्पण देश के करोड़ों लोगों की खुशियों और सुरक्षित जीवन की सबसे बड़ी ताकत है।
मुख्यमंत्री शनिवार को गढ़ीकैंट स्थित गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान में गढ़वाल रेजीमेंट के जवानों और अधिकारियों के साथ दीपावली मनाने पहुंचे। उन्होंने जवानों को मिठाई खिलाकर त्योहार की शुभकामनाएं दीं और उनके साथ आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने सैनिकों के साहस, शौर्य और राष्ट्रसेवा के प्रति आभार जताया।
धामी ने अपने सैनिक परिवार से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म एक सैनिक परिवार में हुआ है। उनके पिता ने सेना में रहते हुए उन्हें अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और देशसेवा के संस्कार दिए। पिता से गढ़वाल रेजीमेंट के वीर सैनिकों की शौर्यगाथाएं सुनने को मिलती थीं। इनमें 1962 के भारत-चीन युद्ध में नूरानांग मोर्चे पर अदम्य साहस दिखाने वाले महावीर चक्र विजेता अमर शहीद जसवंत सिंह रावत की वीरता की कहानी प्रमुख थी। आज उसी रेजीमेंट के जवानों के बीच दीपावली मनाना उनके लिए गर्व और भावुकता का क्षण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में निर्माणाधीन सैन्यधाम का काम लगभग पूरा हो चुका है। यह देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के सम्मान और स्मृति का प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट का इतिहास वीरता, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की गौरवशाली परंपराओं से भरा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत की मजबूत सैन्य शक्ति और सुरक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प का संदेश दिया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पुल व सुरंगों के निर्माण से सेना की क्षमता लगातार बढ़ाई जा रही है।
धामी ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। शहीद सैनिकों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है। साथ ही शहीद के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए आवेदन की समयसीमा भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है।




