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Reading: विधायक की पत्नी ने 17 साल बाद भी खेती नहीं की, 27 नाली जमीन पर सरकार ने लिया कब्जा
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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > विधायक की पत्नी ने 17 साल बाद भी खेती नहीं की, 27 नाली जमीन पर सरकार ने लिया कब्जा
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विधायक की पत्नी ने 17 साल बाद भी खेती नहीं की, 27 नाली जमीन पर सरकार ने लिया कब्जा

Web Editor
Last updated: 2024/10/11 at 10:34 AM
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4 Min Read
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देहरादून : उत्तर प्रदेश के विधायक राजा भैया की पत्नी भानवी ने करीब 17 साल पहले उत्तराखंड में खेती की मंशा जताते हुए 27 नाली जमीन खरीदी थी। यह जमीन नैनीताल जिले के सिल्टोना गांव में खरीदी गई थी। सरकार की अनुमति के बाद निर्धारित प्रयोजन के लिए खरीदी गई भूमि पर खेती नहीं की गई। लिहाजा, प्रदेश में सख्त भू-कानून की मांग के बीच अब रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया से जुड़ी जमीन को राज्य सरकार में निहित कर दिया गया है। दरअसल, राज्य में 250 वर्गमीटर तक भूमि कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में स्वयं या परिवार की आवासीय जरूरत के लिए क्रय कर सकता है। इससे अधिक भूमि निर्धारित प्रयोजन के लिए राज्य सरकार की अनुमति से खरीदी जा सकती है। अब ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सख्ती के बाद कार्रवाई की जाने लगी है।

प्रतापगढ़ जिले के कुंडा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया उप्र की राजनीति में चर्चित चेहरा हैं। उत्तर प्रदेश के साथ ही कई प्रदेशों में राजा भैया की संपत्ति है। वर्ष 2007 में विधायक की पत्नी भानवी सिंह ने बेतालघाट ब्लॉक के सिल्टोना गांव में 0.555 हेक्टेयर कृषि भूमि क्रय की थी। जमीन पर तभी तारबाड़ भी कर दी गई। बाहुबली विधायक से जुड़ा मामला होने से तब यह खरीदारी चर्चा में रही और आसपास के लोगों में दहशत भी बन गई। लंबे समय से जमीन पर प्रयोजन के अनुसार कोई कार्य न होने पर स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच कर जमीन को राज्य सरकार में निहित करने की प्रक्रिया शुरु कर दी।

जिस पर जमीन स्वामी भानवी सिंह ने राजस्व विभाग की कार्रवाई को कमिश्नर कोर्ट व फिर उत्तराखंड राजस्व बोर्ड में भी चुनौती दी। दोनों ही जगह से वह केस हार गईं। मामला पक्ष में आने के बाद अब प्रशासन ने जमीन को राज्य सरकार के खाते में दर्ज कर दिया है। विस्तृत जांच पड़ताल के बाद विधायक की पत्नी के नाम पर खरीदी गई जमीन पर अब राज्य सरकार का नियंत्रण हो चुका है। कैंची धाम तहसील के उपजिलाधिकारी विपिन पंत के अनुसार अब प्रशासन जमीन का पूर्ण कब्जा भी सरकार के पक्ष में प्राप्त करेगा।

प्रयोजनार्थ खरीदी गई भूमि पर 02 वर्ष के भीतर शरू करना होता है काम
नियमानुसार जिस प्रायोजन के लिए जमीन खरीदी जाती है उसमें उसी उद्देश्य से 02 वर्ष के भीतर कार्य होना चाहिए। ऐसे मामलों की नियमित जांच भी होती है। जांच में ही विधायक की पत्नी की सिल्टोना स्थित जमीन पर वर्षों बाद भी कार्य न होने की पुष्टि की गई थी। प्रदेश में बाहरी क्षेत्रों के बड़ी मात्रा में जमीन खरीदने और इससे होने वाले डेमोग्राफिक बदलाव को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जमीन सरकार के अधीन करने की प्रक्रिया शुरु की गई।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों से मांगी भूमि खरीद की रिपोर्ट
प्रदेश में आवासीय प्रयोजन के लिए कोई भी बाहरी व्यक्ति 250 वर्गमीटर तक की भूमि क्रय कर सकता है। इसकी आड़ में तमाम लोग परिवार के अन्य सदस्यों के माध्यम से भी जमीन खरीद रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के तल्ख रुख के बाद मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राजस्व परिषद उत्तराखंड के सचिव, दोनों मंडल के आयुक्त और जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने नियमों का उल्लंघन कर जमीन खरीद रहे व्यक्तियों का ब्यौरा निर्धारित प्रारूप में एक सप्ताह के भीतर मांगा है। साथ ही उन्होंने प्रयोजन से इतर जमीन खरीदकर बैठे व्यक्तियों का विवरण भी तलब किया है।

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