By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद
Share
Notification Show More
Latest News
आपदा में दबे कल्पकेदार मंदिर की खुदाई में जुटे ग्रामीण 
उत्तराखंड
निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज
उत्तराखंड
धार्मिक पर्यटन को मिली नई पहचान: धामी
उत्तराखंड
भूकंप: उत्तराखंड के लिए बड़ा खतरा बन रहा मेन हिमालयन थ्रस्ट
उत्तराखंड
शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद
उत्तराखंड

तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद

Web Editor
Last updated: 2024/11/05 at 6:52 AM
Web Editor
Share
3 Min Read
SHARE

रुद्रप्रयाग : पंचकेदारों में प्रतिष्ठित तृतीय केदार श्री तुंगनाथ मंदिर के कपाट सोमवार पूर्वाह्न 11 बजे शुभ मुहूर्त पर विधि-विधान से शीतकाल के लिए बंद हो गये है। इस अवसर पर मंदिर को सजाया गया था।
कपाट बंद होने के बाद भगवान श्री तुंगनाथ जी की उत्सव डोली ने स्थानीय वाद्य यंत्रों ढोल-दमाऊं सहित बाबा तुंगनाथ के जय उदघोष के साथ प्रथम पड़ाव चोपता को प्रस्थान किया इस अवसर पर पांच सौ से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे।
श्री तुंगनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के अवसर पर अपने संदेश में श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी। उन्होंने बताया कि इस यात्रा वर्ष एक लाख सत्तर हजार से अधिक तीर्थयात्रियों ने भगवान तुंगनाथ जी के दर्शन किये। बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने भी कपाट बंद होने अवसर पर श्रद्धालुओं को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
कपाट बंद होने के एक दिन पहले 3 नवंबर को श्री तुंगनाथ मंदिर में यज्ञ-हवन किया गया था। आज 4 नवंबर प्रातः साढ़े चार बजे मंदिर खुल गया था। प्रातः कालीन पूजा के पश्चात श्रद्धालुओं ने भगवान तुंगनाथ जी के दर्शन किये। ठीक दस बजे से मंदिर गर्भगृह में कपाट बंद की प्रक्रिया शुरू हुई।
भगवान तुंगनाथ के स्वयंभू शिवलिंग को श्रृंगार रूप से समाधि स्वरूप में ले जाया गया। शिवलिंग को स्थानीय पुष्पों, फल पुष्पों, अक्षत से ढक दिया गया।
इसके बाद मठापति रामप्रसाद मैठाणी, प्रबंधक बलबीर नेगी डोली प्रभारी प्रकाश पुरोहित,की उपस्थिति में पुजारी अतुल मैठाणी तथा अजय मैठाणी ने तुंगनाथ मंदिर के कपाट बंद किये।
कपाट बंद होने के बाद मंदिर समिति कर्मचारियों तथा श्रद्धालुओं के साथ मंदिर की परिक्रमा पश्चात अखोड़ी और हुडु गांव के हक-हकूकधारी भगवान तुंगनाथ जी की चल विग्रह डोली के साथ चोपता को प्रस्थान हुए।
बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डाॅ. हरीश गौड़ ने बताया कि 4 नवंबर सोमवार को भगवान तुंगनाथ जी की चल विग्रह डोली चोपता प्रवास करेगी। उन्होंने बताया कि 5 नवंबर तथा 6 नवंबर को चलविग्रह डोली दूसरे पड़ाव भनकुन प्रवास करेगी। इसके बाद 7 नवंबर को भगवान तुंगनाथ जी की चलविग्रह डोली शीतकालीन गद्दीस्थल श्री मर्केटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में विराजमान हो जायेगी।
इसके साथ ही श्री मर्केटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में भगवान तुंगनाथ जी की शीतकालीन पूजाएं शुरू हो जायेगी।
इस अवसर पर मठापति रामप्रसाद मैठाणी, प्रबंधक बलबीर नेगी,डोली प्रभारी प्रकाश पुरोहित सहित पुजारीगण रवीन्द्र मैठाणी, विनोद मैठाणी, चंद्रमोहन बजवाल,दिलवर नेगी, दीपक पंवार,जीतपाल भंडारी, उम्मेद थोर, नरेंद्र भंडारी एवं वन विभाग, पुलिस प्रशासन के प्रतिनिधि, दस्तूरधारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन मौजूद रहे।

You Might Also Like

आपदा में दबे कल्पकेदार मंदिर की खुदाई में जुटे ग्रामीण 

निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज

धार्मिक पर्यटन को मिली नई पहचान: धामी

भूकंप: उत्तराखंड के लिए बड़ा खतरा बन रहा मेन हिमालयन थ्रस्ट

शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट

TAGGED: The doors of Third Kedar Tunganath are closed for winter
Web Editor November 5, 2024
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article नरेंद्रनगर के पास ट्रक खाई में गिरा, दो बच्‍चों और चालक ने कूदकर बचाई जान, परिचालक की मौत
Next Article इस वर्ष 16 लाख, 52 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए बाबा केदार के दर्शन
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

आपदा में दबे कल्पकेदार मंदिर की खुदाई में जुटे ग्रामीण 
उत्तराखंड October 12, 2026
निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज
उत्तराखंड October 11, 2026
धार्मिक पर्यटन को मिली नई पहचान: धामी
उत्तराखंड October 11, 2026
भूकंप: उत्तराखंड के लिए बड़ा खतरा बन रहा मेन हिमालयन थ्रस्ट
उत्तराखंड October 11, 2026

Recent Posts

  • आपदा में दबे कल्पकेदार मंदिर की खुदाई में जुटे ग्रामीण 
  • निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज
  • धार्मिक पर्यटन को मिली नई पहचान: धामी
  • भूकंप: उत्तराखंड के लिए बड़ा खतरा बन रहा मेन हिमालयन थ्रस्ट
  • शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • पहाड़ के स्वाद ने पार किया छह करोड़ का आंकड़ा, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ बना नया बाजार (11,243)
  • अब एआई और रोबोटिक्स सीखेंगे उत्तराखंड के स्कूली बच्चे (9,409)
  • क्यूआर कोड से मिलेगी कुंभ की पूरी जानकारी (9,061)
  • 300 रुपये के लिए वृद्ध दंपती समेत तीन को पेचकस से गोदा, मौत (8,687)
  • दुनियाभर में होगी उत्तराखंड के सेब की ब्राडिंग  (8,476)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?