By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज
Share
Notification Show More
Latest News
निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज
उत्तराखंड
धार्मिक पर्यटन को मिली नई पहचान: धामी
उत्तराखंड
भूकंप: उत्तराखंड के लिए बड़ा खतरा बन रहा मेन हिमालयन थ्रस्ट
उत्तराखंड
शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट
उत्तराखंड
कांग्रेस बोझ समझती है तो घर बैठने को तैयार: हरीश रावत
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज
उत्तराखंड

निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज

Web Editor
Last updated: 2026/10/11 at 4:26 PM
Web Editor
Share
4 Min Read
SHARE

भारत-यूएई के संयुक्त सैन्य अभ्यास माउंटेन गार्डियन में रणनीति पर फोकस

Ranikhet,11 october 2026। दुर्गम पहाड़ों में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने से लेकर संदिग्ध हलचल का आकलन करने और सूचनाओं के आधार पर सैन्य रणनीति बनाने तक, आधुनिक युद्ध में निगरानी व्यवस्था की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। इसी दिशा में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के सैनिक चौबटिया में अपनी सामरिक क्षमताओं को धार दे रहे हैं। रानीखेत स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘माउंटेन गार्डियन-2026’ में दोनों देशों के जवान निगरानी ग्रिड तैयार करने, ड्रोन संचालन और पर्वतीय परिस्थितियों में प्रभावी सैन्य अभियान चलाने का प्रशिक्षण ले रहे हैं। अभ्यास में भारत और यूएई के कुल 92 सैनिक समान संख्या में हिस्सा ले रहे हैं।

 

बॉक्स: दुर्गम इलाकों में निगरानी और सूचनाओं का आकलन

5 से 18 अक्टूबर तक आयोजित 14 दिवसीय सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की भैरव बटालियन और यूएई की माउंटेन इन्फैंट्री बटालियन के जवान भाग ले रहे हैं। अभ्यास के आगामी चरणों में सैनिक निगरानी ग्रिड विकसित करने, ड्रोन संचालित करने और संयुक्त सैन्य योजनाएं तैयार करने का प्रशिक्षण लेंगे।

निगरानी ग्रिड एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके जरिए किसी निर्धारित क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों पर व्यवस्थित नजर रखी जाती है। इससे मिलने वाली सूचनाओं का विश्लेषण कर संभावित खतरों का आकलन करने और अभियान की योजना बनाने में मदद मिलती है। पहाड़ों में ऊंचाई, सीमित आवाजाही के रास्ते और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां निगरानी को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। ऐसे में आधुनिक तकनीक, सटीक सूचनाओं और सैनिकों के बीच बेहतर तालमेल का विशेष महत्व है।

 

बॉक्स: रस्सियों से उतरने से लेकर रात में फायरिंग तक अभ्यास

रक्षा जनसंपर्क अधिकारी, देहरादून, लेफ्टिनेंट कर्नल चेतन सिंह कबसूड़ी के अनुसार, अभ्यास के शुरुआती चरण में दोनों देशों के सैनिकों ने शारीरिक प्रशिक्षण के साथ विभिन्न चुनौतीपूर्ण सैन्य गतिविधियों में भाग लिया। इनमें जिउ-जित्सु, रिफ्लेक्स शूटिंग, रॉक क्लाइंबिंग, रैपलिंग, फॉक्स-लाइन ट्रेनिंग और स्लिथरिंग जैसी गतिविधियां शामिल रहीं। सैनिकों ने दिन और रात में फायरिंग का अभ्यास करने के साथ पर्वतीय युद्ध कौशल भी सीखा।

रैपलिंग में रस्सी के सहारे ऊंचाई से नीचे उतरने का प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि स्लिथरिंग के दौरान हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे जमीन पर उतरने का अभ्यास किया जाता है। आगामी चरण में एकीकृत मैदानी अभ्यास के तहत सैनिक बाधाओं को पार करने और संयुक्त रूप से अभियान चलाने की अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे।

 

बॉक्स: तकनीक और तालमेल से मजबूत होगा रक्षा सहयोग

‘माउंटेन गार्डियन-2026’ का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, सामरिक दक्षता और संयुक्त अभियान संचालित करने की क्षमता को बढ़ाना है। अभ्यास के दौरान भारतीय और यूएई के सैनिक एक-दूसरे के अनुभवों, प्रशिक्षण पद्धतियों और सैन्य तौर-तरीकों को भी समझ रहे हैं।

चौबटिया में आयोजित यह अभ्यास पर्वतीय क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, निगरानी व्यवस्था विकसित करने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सैन्य संचालन की तैयारी को मजबूत करने पर केंद्रित है। इससे दोनों देशों के सैनिकों को साझा प्रशिक्षण के जरिए अपनी क्षमताओं को बेहतर बनाने का अवसर मिल रहा है।

You Might Also Like

धार्मिक पर्यटन को मिली नई पहचान: धामी

भूकंप: उत्तराखंड के लिए बड़ा खतरा बन रहा मेन हिमालयन थ्रस्ट

शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट

कांग्रेस बोझ समझती है तो घर बैठने को तैयार: हरीश रावत

अब एआई और रोबोटिक्स सीखेंगे उत्तराखंड के स्कूली बच्चे

TAGGED: India-UAE Military Exercise Mountain Guardian 2026
Web Editor October 11, 2026
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article धार्मिक पर्यटन को मिली नई पहचान: धामी
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज
उत्तराखंड October 11, 2026
धार्मिक पर्यटन को मिली नई पहचान: धामी
उत्तराखंड October 11, 2026
भूकंप: उत्तराखंड के लिए बड़ा खतरा बन रहा मेन हिमालयन थ्रस्ट
उत्तराखंड October 11, 2026
शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट
उत्तराखंड October 10, 2026

Recent Posts

  • निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज
  • धार्मिक पर्यटन को मिली नई पहचान: धामी
  • भूकंप: उत्तराखंड के लिए बड़ा खतरा बन रहा मेन हिमालयन थ्रस्ट
  • शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट
  • कांग्रेस बोझ समझती है तो घर बैठने को तैयार: हरीश रावत

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • पहाड़ के स्वाद ने पार किया छह करोड़ का आंकड़ा, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ बना नया बाजार (10,679)
  • अब एआई और रोबोटिक्स सीखेंगे उत्तराखंड के स्कूली बच्चे (8,809)
  • क्यूआर कोड से मिलेगी कुंभ की पूरी जानकारी (8,430)
  • 300 रुपये के लिए वृद्ध दंपती समेत तीन को पेचकस से गोदा, मौत (8,287)
  • दुनियाभर में होगी उत्तराखंड के सेब की ब्राडिंग  (7,962)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?