Uttarakhand Imposes Limit on Urea Purchase, Permission Required Beyond 5 Bags
देहरादून, 07 April 2026। उत्तराखंड सरकार ने उर्वरकों की संभावित कमी और कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए यूरिया बिक्री पर सख्त नियंत्रण लागू कर दिया है। अब प्रदेश में कोई भी किसान बिना अनुमति पांच बैग से अधिक यूरिया नहीं खरीद सकेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने और जमाखोरी पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नई व्यवस्था के तहत यदि कोई किसान पांच बैग (प्रत्येक 45 किलोग्राम) से अधिक यूरिया खरीदना चाहता है, तो उसे संबंधित जिले के मुख्य कृषि अधिकारी से पहले अनुमति लेनी होगी। इसके साथ ही किसान को अतिरिक्त खरीद का स्पष्ट कारण भी बताना होगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी खरीद और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा।
कृषि विभाग ने उर्वरक वितरण प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए हैं। अब प्रत्येक किसान को यूरिया देने से पहले उसका आधार कार्ड और भूमि की खतौनी का सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। विक्रेताओं को प्रत्येक बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज करना होगा। वहीं, लीज या ठेके की जमीन पर खेती करने वाले किसानों को भी भूमि से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ाई गई है। नेपाल और उत्तर प्रदेश से सटे इलाकों में राज्य से बाहर यूरिया की बिक्री को कालाबाजारी माना जाएगा और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को नियमित निरीक्षण और जांच के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, हाल के दिनों में ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल और देहरादून जिलों से शिकायतें मिली थीं कि कुछ विक्रेता अलग-अलग किसानों के नाम पर बड़ी मात्रा में यूरिया की बिक्री दिखा रहे हैं। कई मामलों में 50 बैग तक की बिक्री दर्ज की गई, जिससे जमाखोरी की आशंका बढ़ गई थी। इन शिकायतों के बाद विभाग ने निगरानी तंत्र को और मजबूत करने का निर्णय लिया।
कृषि विभाग के निदेशक दिनेश कुमार के अनुसार, प्रदेश में लगभग एक लाख मीट्रिक टन यूरिया की वार्षिक खपत है और वर्तमान में पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि उर्वरक सही किसानों तक समय पर पहुंचे और किसी भी स्तर पर कालाबाजारी या जमाखोरी न हो।




