Rishikesh,03 June 2026। कभी मां के हाथों से बने टिफिन घर-घर पहुंचाकर परिवार का सहारा बनने वाली मीनाक्षी भाटिया अब प्रशासनिक सेवा में अपनी नई पहचान बनाने जा रही हैं। उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में चयनित होकर उन्होंने एसडीएम पद हासिल किया है। उनकी सफलता संघर्ष, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत की ऐसी कहानी है, जो हर उस युवा को प्रेरित करती है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखता है।
मीनाक्षी की जिंदगी आसान नहीं रही। वर्ष 2003 में जब वह मात्र डेढ़ वर्ष की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट छा गया। मां नीलम भाटिया के सामने दो छोटी बेटियों के पालन-पोषण और शिक्षा की बड़ी जिम्मेदारी थी। ऐसे कठिन समय में उन्होंने टिफिन सेवा शुरू कर परिवार को संभाला। मां के संघर्ष को देखते हुए मीनाक्षी और उनकी बड़ी बहन शिल्पा ने भी कम उम्र में जिम्मेदारियां उठानी शुरू कर दीं।
दोनों बहनें पढ़ाई के साथ टिफिन की होम डिलीवरी करती थीं। कई बार उन्हें लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी। तहसील और आसपास के कार्यालयों में टिफिन पहुंचाने के बाद वे वापस पढ़ाई में जुट जाती थीं। बाद में परिवार ने कुछ पैसे जोड़कर एक स्कूटी खरीदी, जिससे समय बचने लगा और दोनों बहनों ने उस अतिरिक्त समय को अपने सपनों को संवारने में लगा दिया।
मीनाक्षी ने वर्ष 2020 में श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के ऋषिकेश परिसर से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की और विश्वविद्यालय की गोल्ड मेडलिस्ट बनीं। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया और इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन महज पांच अंकों से चयन से चूक गईं। हालांकि इस असफलता ने उन्हें निराश नहीं किया। उन्होंने इसे अपनी तैयारी को और मजबूत बनाने का अवसर माना और पहली ही कोशिश में उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में सफलता प्राप्त कर ली।
मीनाक्षी की बड़ी बहन शिल्पा भाटिया भी सफलता की मिसाल हैं। दो वर्ष पहले उनका चयन उत्तराखंड पीसीएस के माध्यम से सांख्यिकी अधिकारी पद पर हुआ था और वर्तमान में वह पौड़ी में सेवाएं दे रही हैं।
किराये के मकान में रहने वाली इन दोनों बहनों की सफलता बताती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो मंजिल जरूर मिलती है। मीनाक्षी की उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उत्तराखंड की हजारों बेटियों के लिए उम्मीद और प्रेरणा की नई कहानी भी है।




