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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > गढ़वाल की विरासत का नया पता बनेगा पौड़ी का ऐतिहासिक कलेक्ट्रेट, अंतिम चरण में जीर्णोद्धार
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गढ़वाल की विरासत का नया पता बनेगा पौड़ी का ऐतिहासिक कलेक्ट्रेट, अंतिम चरण में जीर्णोद्धार

Web Editor
Last updated: 2026/07/23 at 4:46 PM
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4 Min Read
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Dehradun, 23 july 2026। पौड़ी का करीब 175 वर्ष पुराना ब्रिटिशकालीन कलेक्ट्रेट भवन अब नई पहचान पाने जा रहा है। कभी जिले के प्रशासन का केंद्र रहा यह ऐतिहासिक भवन जल्द ही गढ़वाल की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत को संजोने वाले भव्य हेरिटेज सेंटर के रूप में विकसित होगा। भवन के जीर्णोद्धार का कार्य अंतिम चरण में है और इसके पूरा होने के बाद यह परिसर स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा।

वर्ष 1840 में पौड़ी जिले की स्थापना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था अलग-अलग भवनों से संचालित होती रही। इसके बाद 1850 में वर्तमान कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण शुरू हुआ, जिसे पूरा होने में लगभग 11 वर्ष लगे। उस समय इस इमारत के निर्माण पर करीब 1.60 लाख रुपये खर्च हुए थे। ब्रिटिश शासन के भारतीय सिविल सेवा (आईसीएस) अधिकारियों से लेकर स्वतंत्र भारत के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों तक, इस भवन ने प्रशासनिक इतिहास के अनेक महत्वपूर्ण दौर देखे हैं।

वर्ष 2021 में प्रशासनिक कार्यालय नए कलेक्ट्रेट भवन में स्थानांतरित होने के बाद इस धरोहर को संरक्षित करने की पहल शुरू हुई। तत्कालीन जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने इसे हेरिटेज भवन के रूप में विकसित करने की योजना बनाई, जिसका शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया। इसके बाद पूर्व जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और वर्तमान जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने इस परियोजना को आगे बढ़ाया। भवन के संरक्षण और पुनरुद्धार पर 3.11 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि इसे संग्रहालय एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 4.91 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

परियोजना के तहत परिसर में चित्तौड़गढ़ के विजय स्तंभ की तर्ज पर शौर्य स्तंभ का भी निर्माण किया जा रहा है। यह स्मारक गढ़वाल के वीर सपूतों को समर्पित होगा, जहां अमर शौर्य ज्योति निरंतर प्रज्ज्वलित रहेगी। इसके तैयार होने के बाद पूरा परिसर केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि गढ़वाल की पहचान, गौरव और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत केंद्र बन जाएगा।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि हेरिटेज भवन का उद्देश्य केवल एक पुरानी इमारत का संरक्षण नहीं, बल्कि गढ़वाल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को आधुनिक स्वरूप में नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। यहां आने वाले पर्यटक भी जिले की समृद्ध विरासत को करीब से जान और समझ सकेंगे।

बॉक्स : पांच दीर्घाओं में दिखेगा गढ़वाल का गौरव

हेरिटेज भवन में पांच थीम आधारित दीर्घाएं विकसित की जा रही हैं। विरासत भूमि में पौड़ी के इतिहास की यात्रा, वीर भूमि में सैनिकों और रणबांकुरों की शौर्यगाथाएं, लोक संस्कृति दीर्घा में पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, वाद्ययंत्र और ग्रामीण जीवन की झलक दिखाई जाएगी। तपो भूमि में जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों का इतिहास और महत्व प्रदर्शित होगा, जबकि प्रकृति लोक में पौड़ी की जैव विविधता, वन संपदा और प्राकृतिक सौंदर्य को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा।

बॉक्स : इतिहास के साथ मिलेगा पहाड़ का पारंपरिक स्वाद

हेरिटेज परिसर में ‘रस परंपरा’ नाम से एक विशेष कैफे भी बनाया जा रहा है। यहां पर्यटकों को उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद मिलेगा। कैफे में झंगोरे की खीर, मंडुवे की रोटी, काफली, फाणु, चैंसू और भट की चुड़कानी जैसे स्थानीय पकवान परोसे जाएंगे, जिससे गढ़वाल की सांस्कृतिक विरासत के साथ उसकी खानपान परंपरा का भी अनुभव एक ही स्थान पर मिल सकेगा।

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