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उत्तराखंड

देवदूत बना चालक: अपनी जान देकर बचाईं 34 जिंदगियां

Web Editor
Last updated: 2026/06/03 at 3:21 PM
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4 Min Read
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Lohaghaat,03 June 2026। कभी-कभी कर्तव्य की राह में ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जो किसी को नायक बना देते हैं। चंपावत जिले के लोहाघाट में बुधवार सुबह ऐसा ही एक मार्मिक और साहसिक दृश्य देखने को मिला, जब उत्तराखंड परिवहन निगम के चालक बेनीराम थ्वाल ने अपनी जान की कीमत पर 34 यात्रियों की जिंदगी बचा ली। ब्रेक फेल होने के बाद अनियंत्रित हुई रोडवेज बस को उन्होंने खाई में गिरने से बचाने के लिए पहाड़ से टकरा दिया। इस प्रयास में उनकी दर्दनाक मौत हो गई, लेकिन बस में सवार सभी यात्री सुरक्षित बच गए।
जानकारी के अनुसार, टनकपुर डिपो की रोडवेज बस बुधवार सुबह धारचूला से टनकपुर की ओर जा रही थी। बस में लगभग 34 यात्री सवार थे। जब बस लोहाघाट के रायकोट महर क्षेत्र स्थित बकरियां मंदिर के पास पहुंची, तभी अचानक उसके ब्रेक फेल हो गए। पहाड़ी मार्ग पर बस के अनियंत्रित होते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। सामने गहरी खाई थी और बस तेजी से नीचे की ओर बढ़ रही थी।
ऐसे संकटपूर्ण क्षण में चालक बेनीराम थ्वाल ने अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने बस को खाई की ओर जाने से रोकने के लिए स्टीयरिंग मोड़कर वाहन को पहाड़ की तरफ टकरा दिया। यह फैसला कुछ ही सेकंड में लिया गया, लेकिन इसी निर्णय ने 34 परिवारों के चिराग बुझने से बचा लिए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस पहाड़ से टकराते ही चालक की ओर का दरवाजा अचानक खुल गया। जोरदार झटके के कारण बेनीराम वाहन से बाहर सड़क पर गिर पड़े। दुर्भाग्यवश, उसी दौरान बस का पिछला पहिया उनके ऊपर से गुजर गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में एक महिला यात्री घायल हुई, जिसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गया। जेसीबी की मदद से क्षतिग्रस्त बस को सड़क किनारे हटाया गया और यातायात सुचारु कराया गया। पुलिस ने चालक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण ब्रेक फेल होना माना जा रहा है, हालांकि तकनीकी विशेषज्ञों को विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। यात्रियों और स्थानीय लोगों ने बेनीराम थ्वाल को “देवदूत चालक” बताते हुए उनके साहस को सलाम किया। लोगों का कहना है कि यदि चालक ने अंतिम क्षणों में यह निर्णय नहीं लिया होता, तो बस सैकड़ों फीट गहरी खाई में गिर सकती थी और बड़ा जनहानि हादसा हो सकता था।
वहीं, इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में संचालित रोडवेज बसों की फिटनेस और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने परिवहन निगम से वाहनों की नियमित तकनीकी जांच सुनिश्चित करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। बेनीराम थ्वाल की शहादत ने जहां 34 जिंदगियों को नया जीवन दिया, वहीं उनके बलिदान ने कर्तव्यनिष्ठा और साहस की एक अमिट मिसाल भी कायम कर दी।

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Web Editor June 3, 2026
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