By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: उत्तराखंड में ग्रीन रेल युग की शुरुआत
Share
Notification Show More
Latest News
AI, ड्रोन और कैमरा ट्रैप से होगी जंगलों की चौकसी, धामी ने दिए हाईटेक निगरानी के निर्देश
उत्तराखंड
बाघों की सुरक्षा का नया कवच: राजाजी टाइगर रिजर्व में बनेगी टाइगर टास्क फोर्स
उत्तराखंड
ऋषिकेश बनेगा आइकॉनिक सिटी
उत्तराखंड
गढ़वाल की विरासत का नया पता बनेगा पौड़ी का ऐतिहासिक कलेक्ट्रेट, अंतिम चरण में जीर्णोद्धार
उत्तराखंड
उत्तराखंड में ग्रीन रेल युग की शुरुआत
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड में ग्रीन रेल युग की शुरुआत
उत्तराखंड

उत्तराखंड में ग्रीन रेल युग की शुरुआत

Web Editor
Last updated: 2026/07/23 at 4:39 PM
Web Editor
Share
4 Min Read
SHARE

Dehradun, 23 july 2026। उत्तराखंड ने रेलवे के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए शत-प्रतिशत रेल विद्युतीकरण का लक्ष्य पूरा कर लिया है। राज्य का पूरा रेल नेटवर्क अब इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन से संचालित होगा, जिससे रेल सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज, पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा दक्ष बनेंगी। इस बदलाव से न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि चारधाम यात्रा, धार्मिक पर्यटन, उद्योग और व्यापार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
उत्तराखंड के प्रमुख रेलवे स्टेशन और मार्ग, जिनमें हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, काशीपुर, कोटद्वार सहित अन्य रेलखंड शामिल हैं, अब पूरी तरह इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन से जुड़ चुके हैं। राज्य की भौगोलिक और सामरिक महत्ता को देखते हुए यह उपलब्धि और भी अहम मानी जा रही है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु हरिद्वार और ऋषिकेश के साथ चारधाम यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंचते हैं। ऐसे में इलेक्ट्रिक रेल नेटवर्क से यात्रियों को अधिक भरोसेमंद, समयबद्ध और सुगम रेल सेवाएं मिल सकेंगी।
रेल मंत्रालय के अनुसार भविष्य में उत्तराखंड में बनने वाली नई रेल लाइनों और मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी शुरुआत से ही विद्युतीकरण के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इससे राज्य में आधुनिक रेल अवसंरचना का विस्तार तेज होगा।
रेलवे के विद्युतीकरण का सबसे बड़ा लाभ पर्यावरण संरक्षण के रूप में सामने आया है। वर्ष 2015-16 में भारतीय रेलवे के संचालन के लिए 293 करोड़ लीटर डीजल की खपत होती थी, जो 2024-25 में घटकर 108 करोड़ लीटर रह गई। यानी लगभग 185 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत हुई, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार सड़क मार्ग से एक टन माल को एक किलोमीटर तक ले जाने पर 101 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, जबकि रेलवे में यह केवल 11.5 ग्राम है। यानी रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 89 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन करता है। यही कारण है कि रेलवे को देश के हरित परिवहन तंत्र का सबसे मजबूत आधार माना जा रहा है।
भारतीय रेलवे नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी तेजी से बढ़ा रहा है। जून 2026 तक रेलवे 1,161 मेगावाट सौर और 103 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित कर चुका है। आने वाले वर्षों में बिजली की जरूरतों का बड़ा हिस्सा सौर और पवन ऊर्जा से पूरा करने की योजना है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
बॉक्स : रेलवे विद्युतीकरण में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बना भारत
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार भारत के 99.6 प्रतिशत ब्रॉड गेज रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय रेलवे संघ (UIC) की जून 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक स्विट्जरलैंड 100 प्रतिशत विद्युतीकरण के साथ पहले स्थान पर है, जबकि भारत 99.6 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। भारत ने इस मामले में चीन (82%), स्पेन (67%), जापान (64%), फ्रांस (60%) और ब्रिटेन (39%) जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है।
बॉक्स : 12 वर्षों में रिकॉर्ड गति से हुआ रेल विद्युतीकरण
रेल मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014 से पहले लगभग 60 वर्षों में देश में 21,801 मार्ग किलोमीटर रेल लाइनों का विद्युतीकरण हुआ था। वहीं 2014 से 2026 के बीच 48,072 मार्ग किलोमीटर रेल लाइनों का विद्युतीकरण पूरा किया गया। इसे दुनिया के सबसे तेज रेलवे विद्युतीकरण अभियानों में शामिल किया जा रहा है।

You Might Also Like

AI, ड्रोन और कैमरा ट्रैप से होगी जंगलों की चौकसी, धामी ने दिए हाईटेक निगरानी के निर्देश

बाघों की सुरक्षा का नया कवच: राजाजी टाइगर रिजर्व में बनेगी टाइगर टास्क फोर्स

ऋषिकेश बनेगा आइकॉनिक सिटी

गढ़वाल की विरासत का नया पता बनेगा पौड़ी का ऐतिहासिक कलेक्ट्रेट, अंतिम चरण में जीर्णोद्धार

सभी आपातकालीन सेवाओं के लिए अब एक ही नंबर 112, उत्तराखंड में नई व्यवस्था की तैयारी

TAGGED: Green Rail Era Begins, Uttarakhand Rail Network Fully Electrified
Web Editor July 23, 2026
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article सभी आपातकालीन सेवाओं के लिए अब एक ही नंबर 112, उत्तराखंड में नई व्यवस्था की तैयारी
Next Article गढ़वाल की विरासत का नया पता बनेगा पौड़ी का ऐतिहासिक कलेक्ट्रेट, अंतिम चरण में जीर्णोद्धार
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

AI, ड्रोन और कैमरा ट्रैप से होगी जंगलों की चौकसी, धामी ने दिए हाईटेक निगरानी के निर्देश
उत्तराखंड July 24, 2026
बाघों की सुरक्षा का नया कवच: राजाजी टाइगर रिजर्व में बनेगी टाइगर टास्क फोर्स
उत्तराखंड July 24, 2026
ऋषिकेश बनेगा आइकॉनिक सिटी
उत्तराखंड July 24, 2026
गढ़वाल की विरासत का नया पता बनेगा पौड़ी का ऐतिहासिक कलेक्ट्रेट, अंतिम चरण में जीर्णोद्धार
उत्तराखंड July 23, 2026

Recent Posts

  • AI, ड्रोन और कैमरा ट्रैप से होगी जंगलों की चौकसी, धामी ने दिए हाईटेक निगरानी के निर्देश
  • बाघों की सुरक्षा का नया कवच: राजाजी टाइगर रिजर्व में बनेगी टाइगर टास्क फोर्स
  • ऋषिकेश बनेगा आइकॉनिक सिटी
  • गढ़वाल की विरासत का नया पता बनेगा पौड़ी का ऐतिहासिक कलेक्ट्रेट, अंतिम चरण में जीर्णोद्धार
  • उत्तराखंड में ग्रीन रेल युग की शुरुआत

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • मक्‍की की वजह से पर्यटन के नक्‍शे पर आया यह गांव (6,400)
  • राज्य में 12 पी माइनस थ्री पोलिंग स्टेशन बनाए गए (6,258)
  • टिहरी राजपरिवार के पास 200 करोड से अधिक की संपत्ति (4,756)
  • कम मतदान प्रतिशत वाले बूथों पर जनजागरूकता में जुटा चुनाव आयोग (4,709)
  • प्रधानमंत्री माेदी और गृह मंत्री शाह जल्‍द आएंगे उत्‍तराखंड (4,503)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?