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Reading: उत्तराखंड में ग्रीन रेल युग की शुरुआत
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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड में ग्रीन रेल युग की शुरुआत
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उत्तराखंड में ग्रीन रेल युग की शुरुआत

Web Editor
Last updated: 2026/07/23 at 4:39 PM
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4 Min Read
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Dehradun, 23 july 2026। उत्तराखंड ने रेलवे के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए शत-प्रतिशत रेल विद्युतीकरण का लक्ष्य पूरा कर लिया है। राज्य का पूरा रेल नेटवर्क अब इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन से संचालित होगा, जिससे रेल सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज, पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा दक्ष बनेंगी। इस बदलाव से न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि चारधाम यात्रा, धार्मिक पर्यटन, उद्योग और व्यापार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
उत्तराखंड के प्रमुख रेलवे स्टेशन और मार्ग, जिनमें हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, काशीपुर, कोटद्वार सहित अन्य रेलखंड शामिल हैं, अब पूरी तरह इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन से जुड़ चुके हैं। राज्य की भौगोलिक और सामरिक महत्ता को देखते हुए यह उपलब्धि और भी अहम मानी जा रही है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु हरिद्वार और ऋषिकेश के साथ चारधाम यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंचते हैं। ऐसे में इलेक्ट्रिक रेल नेटवर्क से यात्रियों को अधिक भरोसेमंद, समयबद्ध और सुगम रेल सेवाएं मिल सकेंगी।
रेल मंत्रालय के अनुसार भविष्य में उत्तराखंड में बनने वाली नई रेल लाइनों और मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी शुरुआत से ही विद्युतीकरण के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इससे राज्य में आधुनिक रेल अवसंरचना का विस्तार तेज होगा।
रेलवे के विद्युतीकरण का सबसे बड़ा लाभ पर्यावरण संरक्षण के रूप में सामने आया है। वर्ष 2015-16 में भारतीय रेलवे के संचालन के लिए 293 करोड़ लीटर डीजल की खपत होती थी, जो 2024-25 में घटकर 108 करोड़ लीटर रह गई। यानी लगभग 185 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत हुई, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार सड़क मार्ग से एक टन माल को एक किलोमीटर तक ले जाने पर 101 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, जबकि रेलवे में यह केवल 11.5 ग्राम है। यानी रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 89 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन करता है। यही कारण है कि रेलवे को देश के हरित परिवहन तंत्र का सबसे मजबूत आधार माना जा रहा है।
भारतीय रेलवे नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी तेजी से बढ़ा रहा है। जून 2026 तक रेलवे 1,161 मेगावाट सौर और 103 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित कर चुका है। आने वाले वर्षों में बिजली की जरूरतों का बड़ा हिस्सा सौर और पवन ऊर्जा से पूरा करने की योजना है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
बॉक्स : रेलवे विद्युतीकरण में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बना भारत
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार भारत के 99.6 प्रतिशत ब्रॉड गेज रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय रेलवे संघ (UIC) की जून 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक स्विट्जरलैंड 100 प्रतिशत विद्युतीकरण के साथ पहले स्थान पर है, जबकि भारत 99.6 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। भारत ने इस मामले में चीन (82%), स्पेन (67%), जापान (64%), फ्रांस (60%) और ब्रिटेन (39%) जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है।
बॉक्स : 12 वर्षों में रिकॉर्ड गति से हुआ रेल विद्युतीकरण
रेल मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014 से पहले लगभग 60 वर्षों में देश में 21,801 मार्ग किलोमीटर रेल लाइनों का विद्युतीकरण हुआ था। वहीं 2014 से 2026 के बीच 48,072 मार्ग किलोमीटर रेल लाइनों का विद्युतीकरण पूरा किया गया। इसे दुनिया के सबसे तेज रेलवे विद्युतीकरण अभियानों में शामिल किया जा रहा है।

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Web Editor July 23, 2026
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