हर्बल टी ने प्रियंका को बनाया ‘लखपति दीदी’, सालाना 6.40 लाख रुपये की कर रहीं कमाई
टिहरी, लोकसत्य। टिहरी गढ़वाल के थौलधार विकासखंड के धरवाल गांव की प्रियंका बिष्ट ने हर्बल टी को अपनी पहचान ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बना लिया है। कभी घर, खेती और पशुपालन तक सीमित रहने वाली प्रियंका आज हर्बल टी के व्यवसाय से सालाना 6.40 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूएसआरएलएम) की वित्तीय सहायता और स्वयं सहायता समूह के सहयोग से उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
प्रियंका ने वर्ष 2024 में ‘वेदावी स्वयं सहायता समूह’ से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत आयोजित बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्हें विभिन्न आजीविका गतिविधियों की जानकारी मिली। इसी दौरान उन्होंने पहाड़ की औषधीय जड़ी-बूटियों से बनने वाली हर्बल टी की बढ़ती मांग को समझा और इसे व्यवसाय के रूप में अपनाने का फैसला किया।
हालांकि शुरुआत आसान नहीं थी। व्यवसाय शुरू करने के लिए पूंजी सबसे बड़ी चुनौती थी। ऐसे में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मिले रिवॉल्विंग फंड, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) और बैंक ऋण ने उनके सपनों को नई उड़ान दी। उन्होंने छोटे स्तर से शुरुआत की और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया। धीरे-धीरे उनकी हर्बल टी स्थानीय बाजार के साथ अन्य क्षेत्रों में भी पसंद की जाने लगी।
आज प्रियंका का उद्यम प्रतिवर्ष करीब 800 किलोग्राम हर्बल टी का उत्पादन कर रहा है। बढ़ती बिक्री के चलते उनकी वार्षिक आय 6.40 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। बच्चों की शिक्षा, घर की जरूरतें और भविष्य की योजनाएं अब पहले की तुलना में अधिक आत्मविश्वास के साथ पूरी हो रही हैं। परिवार और समाज में भी उनकी पहचान मजबूत हुई है।
प्रियंका की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं है। क्षेत्र में उन्हें ‘हर्बल टी वाली दीदी’ और ‘लखपति दीदी’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने अब तक 20 से अधिक महिलाओं को हर्बल टी निर्माण और स्वरोजगार का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई है। उनकी प्रेरणा से कई महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपना रोजगार शुरू कर रही हैं।
डीआरडीए की परियोजना निदेशक ज्योति ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है। स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। प्रियंका बिष्ट इसका जीवंत उदाहरण हैं कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर ग्रामीण महिलाएं भी अपनी मेहनत के दम पर सफलता की नई कहानी लिख सकती हैं।




