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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > एआई से होगी वनों की पहरेदारी, रियल टाइम में पकड़े जाएंगे अतिक्रमण
उत्तराखंड

एआई से होगी वनों की पहरेदारी, रियल टाइम में पकड़े जाएंगे अतिक्रमण

Web Editor
Last updated: 2026/07/15 at 4:58 AM
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3 Min Read
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Dehradun, 15 july 2026। उत्तराखंड में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए वन विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा लेने जा रहा है। विभाग ने एआई और जीआईएस तकनीक आधारित एक विशेष निगरानी एप तैयार किया है, जिसके माध्यम से वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। साथ ही न्यायालयों में लंबित मामलों की डिजिटल ट्रैकिंग और कार्रवाई की प्रगति भी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। विभाग जल्द ही राज्य के सभी वन प्रभागों में इस एप का ट्रायल शुरू करेगा।
वन विभाग के अनुसार, एप के माध्यम से उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालतों में लंबित वन अतिक्रमण संबंधी मामलों का विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे किसी भी मामले की वर्तमान स्थिति, न्यायालय के आदेश और विभागीय कार्रवाई की जानकारी अधिकारियों को तुरंत उपलब्ध होगी, जिससे निर्णय प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी।
मुख्य वन संरक्षक एवं अतिक्रमण हटाओ अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि सभी प्रभागीय वन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों के अतिक्रमण संबंधी आंकड़ों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। जहां भी रिकॉर्ड में विसंगति मिलेगी, उसे तत्काल दुरुस्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय वन अधिनियम के तहत प्राप्त न्यायिक शक्तियों का प्रभावी उपयोग करते हुए बेदखली के मामलों का समयबद्ध निस्तारण भी सुनिश्चित किया जाएगा। वन संरक्षकों को पूरे अभियान की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग ने एप को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए फील्ड स्तर के अधिकारियों से भी सुझाव मांगे हैं। अधिकारियों का मानना है कि नई प्रणाली लागू होने से वन प्रभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, लंबित मामलों की नियमित निगरानी संभव होगी और कार्रवाई की जवाबदेही भी बढ़ेगी। इससे वन भूमि पर अवैध कब्जों को हटाने के साथ भविष्य में नए अतिक्रमणों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
बॉक्स: सभी वन प्रभागों में होगा ट्रायल
मुख्य वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि जीआईएस आधारित एआई एप का ट्रायल जल्द ही राज्य के सभी वन प्रभागों में शुरू किया जाएगा। इसके लिए सभी प्रभागीय वनाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
बॉक्स: 1,560 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि कराई गई कब्जा मुक्त
वन विभाग के अनुसार वर्ष 2018-19 में राज्य की 11,396.64 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण की चपेट में थी। जून 2024 में शुरू किए गए विशेष “अतिक्रमण हटाओ अभियान” के तहत 31 मार्च 2026 तक 1,560.31 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है। विभाग का मानना है कि एआई आधारित निगरानी प्रणाली लागू होने के बाद अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई और अधिक तेज एवं प्रभावी होगी।

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