Dehradun, 06 September 2026। गढ़वाल हिमालय की 7,120 मीटर ऊंची माउंट त्रिशूल चोटी अब भारतीय सेना के पर्वतारोहियों के साहस और कौशल की परीक्षा लेगी। कोर ऑफ इंजीनियर्स के पर्वतारोहण अभियान को शनिवार को रुड़की स्थित बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। अभियान दल में अनुभवी सैन्य अधिकारी, जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) और जवान शामिल हैं।
सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने दल को रवाना किया। इस दौरान इंजीनियर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला और बंगाल सैपर्स एंड मिलिट्री सर्वे के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया समेत सेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पर्वतारोहण अभियानों में अनुभव रखने वाले अधिकारियों ने टीम से संवाद कर उसका उत्साह बढ़ाया।
रवानगी से पहले अभियान टीम लीडर ने ऑपरेशनल ब्रीफिंग में चढ़ाई के मार्ग, प्रस्तावित कार्यक्रम, सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी दी। लेफ्टिनेंट जनरल सेनगुप्ता ने दल की फिटनेस, मानसिक दृढ़ता और टीम भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान सैनिकों में नेतृत्व, अनुशासन, सहनशक्ति और टीमवर्क की भावना मजबूत करने के साथ चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता विकसित करते हैं।
फिटनेस से तकनीकी दक्षता तक कड़ा प्रशिक्षण
माउंट त्रिशूल अभियान केवल ऊंचाई पर पहुंचने की चुनौती नहीं है। अत्यधिक ठंड, कठिन भूभाग और तेजी से बदलते मौसम के बीच टीम की शारीरिक व मानसिक क्षमता की भी परीक्षा होगी। इसके लिए दल ने ऊंचाई वाले वातावरण में अनुकूलन, कठोर शारीरिक प्रशिक्षण और पर्वतारोहण की तकनीकों का विशेष अभ्यास किया है। तकनीकी और लॉजिस्टिक चुनौतियों से निपटने के लिए भी व्यापक तैयारियां की गई हैं।
टीम लीडर को सौंपा ‘एक्सपेडिशन फ्लैग’
समारोह में अभियान टीम लीडर को औपचारिक रूप से ‘एक्सपेडिशन फ्लैग’ सौंपा गया। इसके बाद दल बेस कैंप की ओर रवाना हुआ। यह अभियान कोर ऑफ इंजीनियर्स की पर्वतारोहण और साहस की परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ विषम परिस्थितियों में सैन्य कौशल, अनुशासन और टीम भावना का प्रदर्शन करेगा।
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