गांवों की पिच से राष्ट्रीय टीम तक पहुंचेगी उत्तराखंड की फुटबॉल प्रतिभा
भूटिया और अनिल बलूनी की मुलाकात में ग्रासरूट स्तर पर टैलेंट तलाशने की रणनीति पर मंथन
Dehradun, 30 August 2026 । उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों और पहाड़ी कस्बों में फुटबॉल खेल रहे युवाओं को बड़े मंच तक पहुंचाने की दिशा में नई पहल की उम्मीद जगी है। भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी बाइचुंग भूटिया अब उत्तराखंड की फुटबॉल प्रतिभाओं को तराशने की मुहिम से जुड़ सकते हैं। इसको लेकर गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने भूटिया से मुलाकात कर प्रदेश में फुटबॉल के विकास और प्रतिभा खोज को लेकर विस्तार से चर्चा की।
मुलाकात का मुख्य फोकस ग्रासरूट स्तर पर छिपी प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण से जोड़ना रहा। पहाड़ी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवा फुटबॉल के प्रति आकर्षित हैं, लेकिन सुविधाओं, प्रशिक्षकों और नियमित प्रतियोगिताओं की कमी के कारण उनकी प्रतिभा कई बार स्थानीय स्तर से आगे नहीं बढ़ पाती। ऐसे खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर पर ही चिन्हित कर उचित प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धी मंच उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया गया।
चर्चा में गांवों और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक प्रतिभा खोज अभियान पहुंचाने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। इसके तहत स्थानीय स्तर पर फुटबॉल खेल रहे युवाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर कोचिंग, आधुनिक प्रशिक्षण तकनीक और प्रतियोगिताओं का अनुभव देने की दिशा में काम किया जा सकता है। इससे खिलाड़ियों को अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिलने की उम्मीद है।
सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड में फुटबॉल के प्रति युवाओं का उत्साह लगातार दिखाई देता है। जरूरत प्रतिभा को सही समय पर पहचानकर उसे उचित दिशा देने की है। प्रयास रहेगा कि प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी जगह बना सकें।
भूटिया का अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल का लंबा अनुभव इस पहल के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खिलाड़ियों की तकनीक, फिटनेस, खेल की समझ और प्रतिस्पर्धी मानसिकता विकसित करने में उनका अनुभव उपयोगी हो सकता है। ऐसे में यह मुलाकात उत्तराखंड में फुटबॉल के लिए जमीनी स्तर से मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में अहम कदम के तौर पर देखी जा रही है।
बाक्स : गढ़वाल हीरोज के साथ मिलकर तलाशेंगे प्रतिभाएं
मुलाकात में गढ़वाल हीरोज फुटबॉल क्लब के साथ मिलकर उदीयमान खिलाड़ियों को तराशने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। क्लब के माध्यम से ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में प्रतिभा तलाशने, चयनित खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण देने और उन्हें नियमित प्रतिस्पर्धी अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सकता है। भूटिया का अनुभव और क्लब का स्थानीय नेटवर्क मिलकर उत्तराखंड में ग्रासरूट फुटबॉल को नई दिशा दे सकता है।




