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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > यमुनोत्री हाईवे पर खत्म होगी बार-बार भूस्खलन की चुनौती
उत्तराखंड

यमुनोत्री हाईवे पर खत्म होगी बार-बार भूस्खलन की चुनौती

Web Editor
Last updated: 2026/09/10 at 4:51 PM
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4 Min Read
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पालीगाड़-जानकीचट्टी के बीच 10 संवेदनशील स्थान चिह्नित, स्थायी उपचार के लिए तैयार होगी डीपीआर

Dehradun, 10 September 2026। यमुनोत्री धाम की यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए यमुनोत्री हाईवे के भूस्खलन और सड़क धंसने वाले संवेदनशील क्षेत्रों का स्थायी उपचार किया जाएगा। पालीगाड़ से जानकीचट्टी के बीच ऐसे 10 डेंजर जोन चिह्नित किए गए हैं, जहां बरसात के दौरान लगातार भूस्खलन, मलबा आने और सड़क प्रभावित होने की समस्या सामने आती है। अब इन स्थानों को अस्थायी तौर पर खोलने के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में काम शुरू किया जा रहा है।
यमुनोत्री हाईवे के चौड़ीकरण कार्य के निरीक्षण के दौरान एनएच के चीफ इंजीनियर रणजीत सिंह रावत ने अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों के उपचार की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों के साथ हाईवे-94 और 507 का स्थलीय निरीक्षण कर चौड़ीकरण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। निर्माण एजेंसियों से विभिन्न स्थानों पर चल रहे कार्यों की जानकारी लेने के साथ उन्होंने निर्धारित समयसीमा में काम पूरा करने को कहा।
चीफ इंजीनियर ने स्पष्ट किया कि चारधाम यात्रा मार्ग जैसे महत्वपूर्ण हाईवे पर निर्माण की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने संवेदनशील स्थानों पर काम के दौरान तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने तथा यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान अधिशासी अभियंता मनोज रावत ने चौड़ीकरण कार्य में सामने आ रही तकनीकी और मैदानी चुनौतियों की जानकारी दी। उन्होंने पालीगाड़ से जानकीचट्टी के बीच चिह्नित 10 भूस्खलन प्रभावित स्थानों के स्थायी उपचार का प्रस्ताव भी अधिकारियों के सामने रखा। विभाग के अनुसार इन डेंजर जोन में बार-बार सामने आने वाली समस्या के स्थायी समाधान के लिए टीएचडीसी से बातचीत चल रही है।
टीएचडीसी की ओर से चिह्नित सभी स्थानों का तकनीकी अध्ययन कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। डीपीआर में प्रत्येक स्थान की भौगोलिक स्थिति, भूस्खलन की प्रकृति और आवश्यक सुरक्षा उपायों का आकलन किया जाएगा। इसके बाद तकनीकी परीक्षण और प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के आधार पर स्थायी उपचार के कार्य शुरू किए जाएंगे।
अधिकारियों का मानना है कि इन स्थानों पर स्थायी सुरक्षा उपाय होने से बरसात और यात्रा सीजन में सड़क बाधित होने की घटनाओं में कमी आएगी। इससे यमुनोत्री धाम आने वाले तीर्थयात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही की सुविधा मिल सकेगी।
संपर्क मार्गों की मरम्मत भी होगी
हाईवे चौड़ीकरण से प्रभावित संपर्क मार्गों को भी दुरुस्त करने की कवायद शुरू हो गई है। सारीगाड़ में चौड़ीकरण कार्य के कारण प्रभावित हुए कंडारी मोटर मार्ग की मरम्मत के लिए पीएमजीएसवाई को पत्र भेजा गया है। विभाग की ओर से सड़क मरम्मत का एस्टीमेट तैयार कराया जा रहा है। स्वीकृति मिलने के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराई जाएगी।
सिंकिंग जोन पर भू-वैज्ञानिक रिपोर्ट का इंतजार
नौगांव-सौली क्षेत्र में सड़क धंसने की समस्या के समाधान के लिए फिलहाल भू-वैज्ञानिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। विभाग के अनुसार रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस क्षेत्र के लिए उपयुक्त तकनीकी उपचार तय किया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर निर्माण और सुरक्षा कार्यों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

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