गौरव सेनानी मिलन समारोह में मुख्यमंत्री ने पूर्व सैनिकों का बढ़ाया हौसला, कहा- सैनिक परिवारों के सम्मान और सुरक्षित भविष्य के लिए सरकार प्रतिबद्ध
Dehradun, 10 september 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सैनिक के जीवन में सेवानिवृत्ति जैसी कोई स्थिति नहीं होती। सेना की वर्दी उतरने के बाद भी देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का भाव उसके जीवन में हमेशा कायम रहता है। सैनिकों ने देश की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अपना वर्तमान समर्पित किया है। उनके त्याग और बलिदान की कीमत कभी नहीं चुकाई जा सकती, लेकिन सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और उनके परिवारों के सम्मान व सुरक्षित भविष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है।
हल्द्वानी में आयोजित गौरव सेनानी मिलन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल देवभूमि के रूप में ही नहीं, बल्कि वीरभूमि के रूप में भी है। प्रदेश की सैन्य परंपरा बेहद समृद्ध रही है और यहां के अनेक वीरों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। दरबान सिंह नेगी, गबर सिंह नेगी, जनरल बीसी जोशी और जनरल बिपिन रावत जैसे वीर सपूत उत्तराखंड की सैन्य विरासत के प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के बड़ी संख्या में परिवार किसी न किसी रूप में सेना, पुलिस या सशस्त्र बलों से जुड़े हैं। ऐसे में सैनिकों और उनके आश्रितों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी सामान्य से कहीं अधिक है। सरकार की नीतियों का उद्देश्य सैनिक परिवारों को सम्मान देने के साथ उन्हें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना भी है।
बलिदानी परिवारों की अनुग्रह राशि पांच गुना
मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिदानी सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है। परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों को मिलने वाली सहायता राशि भी 50 लाख से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये कर दी गई है। बलिदानी सैनिक के परिवार के एक सदस्य को राज्य सेवा में समायोजित करने की व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। इसके लिए आवेदन की समयसीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष की गई है।
संपत्ति खरीद पर पूर्व सैनिकों को राहत
धामी ने बताया कि सेवारत और पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की अचल संपत्ति खरीदने पर स्टांप शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वरोजगार शुरू करने वाले पूर्व सैनिकों को विशेष सहायता उपलब्ध कराने के साथ सैन्य परिवारों के भूमि संबंधी मामलों के शीघ्र निस्तारण और शस्त्र लाइसेंस से जुड़े लंबित मामलों के समाधान के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
अंतिम चरण में सैन्य धाम का निर्माण
मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून के गुनियाल गांव में बन रहा सैन्य धाम निर्माण के अंतिम चरण में है। यह स्मारक उत्तराखंड के वीर सैनिकों के शौर्य, त्याग और बलिदान की गाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि सैनिकों के हित में लिए जा रहे सरकारी निर्णय महज योजनाएं नहीं हैं, बल्कि देश की रक्षा करने वाले वीर जवानों और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति हैं।
समारोह में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, कर्नल अजय कोठियाल, राम सिंह कैड़ा, सूबेदार मेजर बहादुर सिंह मेहरा, कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी, कैप्टन गंभीर सिंह धामी, शमशेर सिंह बिष्ट सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और अन्य लोग उपस्थित रहे।




