हर जिप्सी पर जीपीएस से नजर, गेट से लेकर जंगल के संवेदनशील इलाकों तक लगेंगे सीसीटीवी; सफारी में मोबाइल पर रहेगी सख्ती
Dehradun. 11 September 2026: कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में इस बार जंगल सफारी सिर्फ रोमांच नहीं, बल्कि हाईटेक निगरानी के घेरे में होगी। 15 नवंबर से शुरू होने वाले नए पर्यटन सत्र में वन विभाग ने पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी की है। दोनों टाइगर रिजर्व के पर्यटन जोन में चलने वाली सभी जिप्सियों को जीपीएस से लैस किया जाएगा। इससे वन विभाग हर जिप्सी की लोकेशन पर नजर रख सकेगा और यह भी पता चलेगा कि वाहन निर्धारित ट्रैक से बाहर तो नहीं जा रहा।
सिर्फ जिप्सियों की निगरानी तक व्यवस्था सीमित नहीं रहेगी। सभी प्रमुख पर्यटन गेटों के साथ जंगल के संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। जरूरत के मुताबिक ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी की जाएगी। इस पूरी व्यवस्था का मकसद सफारी के दौरान नियमों का उल्लंघन रोकने के साथ वन्यजीवों और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मोबाइल निकालने पर भी रहेगी नजर
सफारी के दौरान पर्यटकों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर लागू प्रतिबंध को इस बार सख्ती से लागू कराया जाएगा। वन्यजीवों के करीब पहुंचते ही कई पर्यटक फोटो और वीडियो बनाने के लिए मोबाइल निकाल लेते हैं और जिप्सी रुकवाने का प्रयास करते हैं। इससे सफारी व्यवस्था प्रभावित होने के साथ वन्यजीवों के स्वाभाविक व्यवहार में भी खलल पड़ सकता है। अचानक वाहन रुकने या पर्यटकों के असावधान होने से सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बढ़ता है। ऐसे में वन विभाग नियमों के उल्लंघन पर सख्ती बरतने की तैयारी में है।
हर जिप्सी की गतिविधि होगी रिकॉर्ड
कार्बेट टाइगर रिजर्व में करीब 385, जबकि राजाजी टाइगर रिजर्व में करीब 237 जिप्सियां पर्यटन गतिविधियों में संचालित होती हैं। जीपीएस लगने के बाद इन वाहनों की वास्तविक समय में लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी। जिप्सी निर्धारित रूट पर चल रही है या नहीं, कितनी देर किसी स्थान पर रुकी और कहीं प्रतिबंधित क्षेत्र में तो नहीं गई, इसकी निगरानी आसान होगी। नियम तोड़ने वाली जिप्सियों की पहचान भी जीपीएस रिकॉर्ड के आधार पर की जा सकेगी।
अक्टूबर में दुरुस्त होंगे सफारी ट्रैक
वर्षाकाल में क्षतिग्रस्त हुए सफारी ट्रैक को पर्यटन सत्र शुरू होने से पहले दुरुस्त किया जाएगा। इसके लिए अक्टूबर में ट्रैक की मरम्मत का काम प्रस्तावित है। कार्बेट में जिप्सियों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि राजाजी में सितंबर के अंत तक पंजीकरण शुरू होने की उम्मीद है। विभाग का प्रयास है कि 15 नवंबर से पहले दोनों टाइगर रिजर्व के पर्यटन जोन में जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं।
चालक और गाइडों को मिलेगा प्रशिक्षण
सफारी व्यवस्था में चालक और नेचर गाइड की भूमिका भी अहम होगी। पर्यटकों को जंगल के नियमों का पालन कराने के साथ वन्यजीवों के व्यवहार और सुरक्षित दूरी की जानकारी देने की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर रहेगी। इसलिए दोनों टाइगर रिजर्व में चालकों और नेचर गाइडों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण सितंबर के अंत या अक्टूबर के पहले पखवाड़े में कराया जाएगा।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला और राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे के अनुसार नए पर्यटन सत्र में निगरानी व्यवस्था को तकनीक से मजबूत किया जा रहा है। जीपीएस, सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी के साथ प्रशिक्षित चालक व गाइड तैनात रहने से सफारी को अधिक सुरक्षित, अनुशासित और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।




