New Delhi,18 October 2026। मोबाइल पर अनजान नंबर से आने वाली कॉल उठानी है या नहीं, यह फैसला करना जल्द आसान हो सकता है। अब केवल नंबर देखकर कॉल करने वाले की पहचान का अंदाजा लगाने के बजाय मोबाइल स्क्रीन पर उसका नाम भी दिखाई देगा। केंद्र सरकार एक नवंबर 2026 से कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (सीएनएपी) सेवा लागू करने की तैयारी कर रही है। इस व्यवस्था से ट्रूकॉलर जैसे एप की जरूरत कम हो सकती है। खास बात यह है कि इसके लिए मोबाइल में अलग से कोई एप डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी।
नई व्यवस्था में कॉल करने वाले का नाम दूरसंचार कंपनी के सत्यापित ग्राहक रिकॉर्ड के आधार पर दिखाया जाएगा। यदि संबंधित नंबर मोबाइल में पहले से सेव है, तो फोन में दर्ज नाम दिखाई देगा। वहीं, नंबर सेव नहीं होने पर दूरसंचार कंपनी के रिकॉर्ड में उपलब्ध नाम स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाएगा। इससे अनजान कॉल की पहचान करने में उपभोक्ताओं को मदद मिलेगी।
4जी और 5जी नेटवर्क पर लागू होगी व्यवस्था
दूरसंचार विभाग के निर्देशों के अनुसार, सीएनएपी सेवा की शुरुआत एक नवंबर से 4जी और 5जी जैसे आधुनिक मोबाइल नेटवर्क पर की जानी है। इसके लिए दूरसंचार कंपनियों को अपने नेटवर्क में जरूरी तकनीकी बदलाव करने होंगे। जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया जैसी कंपनियों के नेटवर्क पर यह सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी है। हालांकि, 2जी और 3जी नेटवर्क के साथ लैंडलाइन फोन पर इसे लागू करने के संबंध में अलग से निर्णय लिया जाएगा।
कैसे पता चलेगा कॉल करने वाले का नाम?
सीएनएपी यानी कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन एक ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए कॉल आने पर फोन करने वाले का नाम भी मोबाइल स्क्रीन पर दिखाया जा सकता है। इसके लिए दूरसंचार कंपनियां अपने ग्राहकों के नाम और मोबाइल नंबर से जुड़े रिकॉर्ड का इस्तेमाल करेंगी। जब कोई व्यक्ति कॉल करेगा, तो प्राप्तकर्ता की दूरसंचार कंपनी संबंधित रिकॉर्ड से नाम की जानकारी लेकर स्क्रीन पर दिखाएगी। विदेश से आने वाली कुछ कॉल पर नाम के स्थान पर ‘इंटरनेशनल कॉल’ प्रदर्शित हो सकता है।
साइबर ठगी रोकने में मिलेगी मदद
फर्जी बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या किसी कंपनी का प्रतिनिधि बनकर फोन करने वाले लोगों की पहचान करने में यह सुविधा मददगार साबित हो सकती है। खासकर उन लोगों को राहत मिलेगी, जो अनजान नंबर से आने वाली कॉल को लेकर अक्सर असमंजस में रहते हैं। हालांकि, केवल नाम दिखाई देने से किसी कॉल को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसा सकते हैं। इसलिए किसी भी अनजान कॉल पर ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी या अन्य गोपनीय विवरण साझा नहीं करना चाहिए।
निजता का भी रखा जाएगा ध्यान
सीएनएपी सेवा में उपभोक्ताओं की निजता को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन प्रतिबंध यानी सीएलआईआर की सुविधा लेने वाले ग्राहकों का नाम प्रदर्शित नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, कॉल समाप्त होने के बाद पहचान संबंधी जानकारी को क्वेरी-रिस्पॉन्स प्रक्रिया के जरिए सुरक्षित रखने पर रोक से जुड़े प्रावधान भी किए गए हैं।
कुल मिलाकर, सीएनएपी सेवा का उद्देश्य कॉल करने वाले की पहचान को आसान बनाना और अनचाही कॉल तथा संभावित साइबर धोखाधड़ी से बचाव में मदद करना है। हालांकि, इस सुविधा का वास्तविक लाभ इसके क्रियान्वयन और दूरसंचार कंपनियों के रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर निर्भर करेगा।




