Yamunotri Ropeway Project May See Alignment Change, Decision Awaited by Uttarakhand Government
देहरादून, 20 March 2026। उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित यमुनोत्री रोपवे परियोजना को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ सकता है। परियोजना के प्रस्तावित एलाइनमेंट (समरेखण) में संशोधन पर शासन स्तर पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। अंतिम निर्णय के बाद ही निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने जानकारी दी कि यह परियोजना निर्धारित समझौते और तकनीकी मानकों के अनुरूप ही क्रियान्वित की जाएगी। परियोजना की गुणवत्ता और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए 15 अप्रैल 2025 को ब्रिडकुल को इंडिपेंडेंट इंजीनियर नियुक्त किया गया है। यह एजेंसी निर्माण से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं पर नजर रखेगी।
उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों की टीम ने जानकी चट्टी (खरसाली) से यमुनोत्री धाम तक प्रस्तावित मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कुछ तकनीकी और व्यवहारिक चुनौतियां सामने आईं, जिसके चलते एलाइनमेंट में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया गया है। फिलहाल यह प्रस्ताव शासन के विचाराधीन है।
सरकार का मानना है कि यदि समरेखण में बदलाव किया जाता है तो परियोजना को अधिक सुरक्षित, सुगम और व्यावहारिक बनाया जा सकेगा। इससे निर्माण कार्य में आने वाली संभावित अड़चनों को भी कम किया जा सकेगा और भविष्य में रोपवे संचालन अधिक सुरक्षित रहेगा।
निर्णय होने के बाद ही परियोजना के निर्माण कार्य को शुरू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस महत्वाकांक्षी योजना को तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए।
गौरतलब है कि यमुनोत्री रोपवे परियोजना चारधाम यात्रा को सुगम बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। इसके शुरू होने से श्रद्धालुओं को जानकी चट्टी से यमुनोत्री धाम तक की कठिन पैदल यात्रा से राहत मिलेगी। साथ ही पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
बाक्स: क्यों जरूरी हुआ बदलाव
स्थलीय निरीक्षण के दौरान सामने आई तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं के चलते निजी निवेशक ने मौजूदा एलाइनमेंट में संशोधन का सुझाव दिया है। इसी आधार पर नया प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जिस पर फिलहाल विचार चल रहा है।
बाक्स: परियोजना की मुख्य बातें
लंबाई: करीब 3–4 किलोमीटर
अनुमानित समय: 15–20 मिनट
निर्माण मॉडल: पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप)
लागत: लगभग 1500 करोड़ रुपये
तकनीक: आधुनिक मोनो-केबल रोपवे




