Dehradun, 04 May 2026। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग ने एक बेहद जटिल और हाई-रिस्क हृदय रोगी का सफल उपचार कर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। आधुनिक टवी (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन) तकनीक के जरिए 59 वर्षीय मरीज को बिना ओपन-हार्ट सर्जरी के नया जीवन दिया गया।
मरीज गंभीर कैल्सिफिक एओर्टिक स्टेनोसिस और बहु-वाल्व जटिलताओं से पीड़ित था। पहले उस पर ओपन-हार्ट सर्जरी का प्रयास किया गया, लेकिन “पोर्सलीन एओर्टा” जैसी गंभीर स्थिति के चलते सर्जरी बीच में ही रोकनी पड़ी। इस स्थिति में एओर्टा की दीवार में अत्यधिक कैल्सीफिकेशन होने के कारण सर्जरी करना अत्यंत जोखिमपूर्ण होता है और स्ट्रोक जैसी जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में मरीज को “सर्जिकल टर्नडाउन” श्रेणी में रखा गया, जहां पारंपरिक सर्जरी संभव नहीं थी और टवी ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प बचा।
अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. तनुज भाटिया के नेतृत्व में विशेषज्ञों की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। टीम में डॉ. अशोक जयंत (कार्डियक सर्जन), डॉ. हरि ओम खंडेलवाल (कार्डियक एनेस्थेटिस्ट) सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे। उन्नत इमेजिंग तकनीकों और अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से बिना छाती खोले नया एओर्टिक वाल्व प्रत्यारोपित किया गया।
टवी तकनीक आधुनिक कार्डियोलॉजी में क्रांतिकारी मानी जा रही है। इसमें कैथेटर के माध्यम से रक्त वाहिकाओं के जरिए हृदय तक पहुंचकर खराब वाल्व को बदला जाता है। इससे सर्जरी का जोखिम कम होता है, दर्द कम होता है और मरीज तेजी से सामान्य जीवन में लौट पाता है।
डॉ. तनुज भाटिया के अनुसार, इस तरह के जटिल मामलों में सफलता केवल आधुनिक सुविधाओं से नहीं, बल्कि विशेषज्ञता, टीमवर्क और बेहतर समन्वय से संभव होती है। यह उपलब्धि क्षेत्र में उन्नत हृदय रोग उपचार की बढ़ती क्षमता को भी दर्शाती है।
श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में बिना ओपन सर्जरी मरीज को मिला नया जीवन
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