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Reading: सड़कों पर उतरेंगी विशेष नियोनेटल एंबुलेंस
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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > सड़कों पर उतरेंगी विशेष नियोनेटल एंबुलेंस
उत्तराखंड

सड़कों पर उतरेंगी विशेष नियोनेटल एंबुलेंस

Web Editor
Last updated: 2026/07/03 at 4:24 PM
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3 Min Read
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Dehradun, 04 July 2026। समय से पहले जन्मे और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को सुरक्षित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने पहली बार नियोनेटल रोड एंबुलेंस (विशेष नवजात एंबुलेंस) का प्रावधान करते हुए एंबुलेंस मानक एआईएस-125 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। नए मानकों के लागू होने के बाद सड़क पर ऐसी विशेष एंबुलेंस संचालित होंगी, जिनमें नवजात शिशुओं के इलाज के लिए अत्याधुनिक जीवनरक्षक उपकरण उपलब्ध होंगे।

वर्तमान में छोटे शहरों और जिला अस्पतालों में जन्मे गंभीर या प्री-मैच्योर नवजातों को उच्च स्तरीय अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए सामान्य एंबुलेंस का उपयोग किया जाता है, जिनमें आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का अभाव होता है। नए प्रस्ताव के तहत बनने वाली विशेष एंबुलेंस में इन्क्यूबेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट, मॉनिटरिंग सिस्टम और अन्य जरूरी जीवनरक्षक उपकरण लगाए जाएंगे, ताकि अस्पताल पहुंचने तक भी शिशु का उपचार लगातार जारी रह सके।

मंत्रालय का मानना है कि सड़क एंबुलेंस आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि गंभीर मरीजों को दुर्घटना या आपात स्थिति के बाद पहले एक घंटे के भीतर उचित इलाज मिल जाए तो बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकती हैं। इसी उद्देश्य से एंबुलेंस को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और जरूरत के अनुरूप बनाने की दिशा में यह संशोधन किया जा रहा है।

मसौदे में बी, सी और डी श्रेणी की सभी रोड एंबुलेंस में आधुनिक रेस्क्यू उपकरण अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव है। इन उपकरणों की मदद से सड़क दुर्घटनाओं में वाहनों में फंसे लोगों को तेजी से बाहर निकाला जा सकेगा। साथ ही इलेक्ट्रिक एंबुलेंस में चिकित्सा उपकरणों को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए अलग पावर सोर्स की व्यवस्था भी की जाएगी।

ये मानक केवल राष्ट्रीय राजमार्गों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि देशभर में बनने वाली सभी नई रोड एंबुलेंस पर लागू किए जाएंगे। मंत्रालय ने मसौदा सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया है। सुझावों पर विचार के बाद अंतिम अधिसूचना जारी होगी।

उत्तराखंड के लिए क्यों अहम?

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में यह पहल बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दूरस्थ गांवों से गंभीर या समय से पहले जन्मे नवजातों को देहरादून, हल्द्वानी, ऋषिकेश या अन्य बड़े अस्पतालों तक पहुंचाने में कई घंटे लग जाते हैं। बारिश, भूस्खलन और दुर्गम सड़कों के कारण जोखिम और बढ़ जाता है। ऐसे में विशेष नियोनेटल एंबुलेंस सफर के दौरान ही इलाज उपलब्ध कराकर नवजातों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

बॉक्स: मल्टी-स्ट्रेचर एंबुलेंस भी आएंगी

मसौदे में मल्टी-स्ट्रेचर रोड एंबुलेंस का भी प्रावधान किया गया है। इन एंबुलेंस में एक साथ कई मरीजों को ले जाया जा सकेगा। बड़े सड़क हादसों, प्राकृतिक आपदाओं और सामूहिक दुर्घटनाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्य में इनका उपयोग काफी प्रभावी माना जा रहा है।

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