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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > मलबे के नीचे छिपा है कोई सुराग,  रडार से तमक नाले में तलाश
उत्तराखंड

मलबे के नीचे छिपा है कोई सुराग,  रडार से तमक नाले में तलाश

Web Editor
Last updated: 2026/08/19 at 5:21 AM
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Dehradun, 19 August 2026: तमक नाले में तेज बहाव और मलबे की चपेट में आकर लापता हुए हवलदार पंकज की तलाश अब जमीन की सतह से आगे बढ़ गई है। रेस्क्यू टीमों ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) को सर्च अभियान में शामिल किया है। यह अत्याधुनिक उपकरण जमीन और मलबे के भीतर छिपे संभावित स्थानों की पहचान करने में मदद कर रहा है। यानी जहां सामान्य सर्च में नजर नहीं पहुंच रही, वहां रडार के संकेत सुराग तलाशने का काम कर रहे हैं।

ज्योतिर्मठ तहसील के ग्राम लोंग सेगड़ी के समीप तमक नाले में अतिवृष्टि के बाद आए तेज पानी और मलबे में सीमा सड़क संगठन की 123 इकाई में तैनात चालक पंकज लापता हुए थे। उनकी तलाश में जिला प्रशासन के निर्देशन में पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सीमा सड़क संगठन और गढ़वाल राइफल्स की टीमें दिन-रात जुटी हैं।

ऐसे काम करता है ‘जमीन के भीतर देखने वाला’ रडार

जीपीआर जमीन की सतह से अंदर की ओर रेडियो तरंगें भेजता है। ये तरंगें अलग-अलग पदार्थों से टकराकर वापस लौटती हैं। लौटने वाली तरंगों में होने वाले बदलाव को उपकरण रिकॉर्ड करता है। इसके आधार पर जमीन या मलबे के नीचे मौजूद खाली जगह, असामान्य संरचना या किसी वस्तु की संभावित मौजूदगी वाले स्थानों को चिह्नित किया जा सकता है।

तमक नाले में जमा भारी बोल्डर और मलबे के बीच जीपीआर की मदद से ऐसे स्थानों की तकनीकी जांच की जा रही है, जहां सामान्य आंखों से पहुंचना मुश्किल है। हालांकि पानी से अत्यधिक संतृप्त जमीन और बेहद असमान मलबे में रडार की क्षमता प्रभावित हो सकती है, इसलिए इसके संकेतों की पुष्टि अन्य सर्च तकनीकों से की जाती है।

तीन एक्सकेवेटर और 50 से अधिक जवान

सर्च अभियान में तीन एक्सकेवेटर लगाए गए हैं। गढ़वाल राइफल्स और 123 इकाई के 50 से अधिक जवान लगातार मलबे और नाले के आसपास तलाश कर रहे हैं। दो प्रशिक्षित सर्च एंड रेस्क्यू डॉग भी संभावित स्थानों को खंगाल रहे हैं। दुर्गम इलाकों में निगरानी के लिए ड्रोन की मदद ली जा रही है।

भारी बोल्डरों और मलबे को मशीनों से हटाने के बाद नीचे और आसपास के हिस्सों की फिर जांच की जा रही है। नाले से आगे नदी के दोनों किनारों पर भी सर्च का दायरा बढ़ाया गया है।

प्रशासन ने संभावित सभी स्थानों को चिन्हित कर क्रमवार जांच के निर्देश दिए हैं। रडार, ड्रोन, खोजी कुत्ते और भारी मशीनरी—तमक नाले में हर तकनीक को एक ही लक्ष्य के लिए लगाया गया है, ताकि मलबे के बीच छिपा कोई सुराग तलाश से छूट न जाए।

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