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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > पहली बार सर्दियों में भी खुलेगी नेलांग घाटी, एक दिसंबर से पर्यटकों को मिलेगा प्रवेश
उत्तराखंड

पहली बार सर्दियों में भी खुलेगी नेलांग घाटी, एक दिसंबर से पर्यटकों को मिलेगा प्रवेश

Web Editor
Last updated: 2026/10/04 at 4:31 PM
Web Editor
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3 Min Read
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Dehradun, 05 october 2026। उत्तरकाशी की नेलांग घाटी में अब पर्यटक केवल गर्मियों में ही नहीं, बल्कि सर्दियों में भी हिमालय की खूबसूरती का दीदार कर सकेंगे। गंगोत्री नेशनल पार्क के अंतर्गत आने वाली यह सामरिक और प्राकृतिक रूप से महत्वपूर्ण घाटी पहली बार एक दिसंबर से शीतकालीन पर्यटन के लिए खोली जाएगी। वन विभाग ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। बर्फ से ढके पहाड़ों, ठंडे रेगिस्तान जैसे भूभाग और दुर्लभ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के लिए पहचानी जाने वाली इस घाटी को विंटर टूरिज्म के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य स्नो लेपर्ड टूरिज्म को बढ़ावा देना भी है। इससे स्थानीय युवाओं को गाइड, पर्यटन सहायक और अन्य सेवाओं के माध्यम से रोजगार से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक एवं प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल ने बताया कि सर्दियों में नेलांग घाटी खोलने से पर्यटकों को यहां के विशिष्ट प्राकृतिक परिदृश्य को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। साथ ही स्नो लेपर्ड टूरिज्म को भी विकसित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि स्थानीय निवासियों को पर्यटन संबंधी कौशल का प्रशिक्षण देने के लिए लद्दाख भेजा जा रहा है। प्रशिक्षण लेकर लौटने वाले स्थानीय लोग भविष्य में वन्यजीव पर्यटन की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे। इससे पर्यटन का लाभ स्थानीय स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

 

सालभर पर्यटन की दिशा में पहल

अब तक नेलांग घाटी में पर्यटन गतिविधियां मुख्य रूप से गर्मियों तक सीमित रही हैं। सर्दियों में पर्यटकों के लिए इसे खोलने से गंगोत्री नेशनल पार्क में पर्यटन का दायरा बढ़ेगा। हालांकि, यहां पर्यटन विकसित करते समय संवेदनशील हिमालयी पर्यावरण और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण भी प्राथमिकता रहेगा।

वन विभाग के प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने मैकिन्से के आकलन का हवाला देते हुए बताया कि वन्यजीव पर्यटन के लिए आने वाले पर्यटक सामान्य पर्यटकों की तुलना में पांच से छह गुना अधिक खर्च करते हैं। ऐसे में नेलांग घाटी में नियंत्रित और टिकाऊ वन्यजीव पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का माध्यम बन सकता है।

भारत-तिब्बत व्यापार का ऐतिहासिक गलियारा

नेलांग घाटी केवल प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विरासत के लिए भी खास पहचान रखती है। कभी भारत और तिब्बत के बीच व्यापार का प्रमुख मार्ग रही इस घाटी में ठंडे रेगिस्तान जैसी भौगोलिक संरचना, ऊंचे पहाड़ और दुर्गम रास्ते इसकी विशिष्टता बढ़ाते हैं।

यहां स्थित करीब 150 वर्ष पुराना गर्तांग गली का लकड़ी का पुल पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। चट्टानों को काटकर तैयार किया गया यह ऐतिहासिक पुल क्षेत्र की स्थापत्य कला और पुराने व्यापारिक संपर्कों की कहानी बयां करता है।

सर्दियों में घाटी खुलने से पर्यटकों को इस ऐतिहासिक विरासत के साथ हिमालय के एक अलग और अनदेखे रूप को देखने का अवसर मिलेगा।

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