Dehradun, 20 August 2026। साइबर हमलों का खतरा जितना तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से साइबर सुरक्षा की रणनीति भी बदल रही है। अब सरकार सिर्फ डिजिटल खामियां खोजने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि यह तय करने पर जोर दे रही है कि हजारों साइबर अलर्ट में से कौन-सा वास्तविक खतरा है, कितना गंभीर है और सबसे पहले किस पर कार्रवाई जरूरी है। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार ने ‘साइबर कुश्ती-2026’ नाम से राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता हैकाथॉन शुरू किया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान की इस पहल में मशीन और इंसान की साइबर कुश्ती देखने को मिलेगी। 15 अगस्त से शुरू हुई प्रतियोगिता का मकसद यह परखना है कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालित उपकरणों से मिले हजारों निष्कर्षों में से असली खतरे को कितनी सटीकता से पहचान सकते हैं।
एआई बताएगी खामी, इंसान लगाएगा खतरे का पैमाना
साइबर कुश्ती पारंपरिक हैकाथॉन से अलग होगी। प्रतिभागियों को जानबूझकर अपूर्ण सुरक्षा आकलन सामग्री दी जाएगी। इसमें एआई से तैयार निष्कर्ष, स्थिर विश्लेषण, निर्भरता और गुप्त जानकारी की जांच, तकनीकी संरचना के दस्तावेज, स्रोत कोड और एप्लीकेशन रिकॉर्ड शामिल होंगे।
इनमें कुछ निष्कर्ष सही होंगे तो कुछ गलत और कुछ एक-दूसरे की पुनरावृत्ति वाले। कुछ वास्तविक कमजोरियों को छिपाया भी जाएगा। ऐसे में टीमों को सिर्फ ज्यादा से ज्यादा खामियां खोजने के बजाय सही खामी पहचानने, गलत चेतावनी को खारिज करने और अपने फैसले का तकनीकी आधार बताने की चुनौती मिलेगी।
यानी इस मुकाबले में सवाल यह नहीं होगा कि मशीन ने कितनी कमजोरियां खोजीं, बल्कि यह होगा कि इंसान उनमें से वास्तविक खतरे को कितनी समझदारी से चुन पाया।
साइबर विशेषज्ञता की होगी असली परीक्षा
राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के महानिदेशक प्रो. डॉ. एमएम त्रिपाठी के अनुसार साइबर सुरक्षा की चुनौती अब केवल समस्या खोजने तक सीमित नहीं है। मशीनें बेहद कम समय में संभावित खतरों की लंबी सूची तैयार कर सकती हैं, लेकिन उनमें से वास्तविक, गंभीर और प्राथमिकता वाले खतरे की पहचान के लिए विशेषज्ञ निर्णय क्षमता जरूरी है।
इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों और स्वतंत्र शोधकर्ताओं को तीन सदस्यीय टीम में भाग लेने का अवसर दिया गया है। प्रतियोगिता में भागीदारी निशुल्क है और पंजीकरण 10 सितंबर 2026 तक किया जा सकेगा। सभी टीमों को समान सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे महंगे साइबर सुरक्षा उपकरणों के आधार पर मिलने वाली बढ़त सीमित रहे। प्रतिभागी अपनी पसंद के एआई उपकरणों का इस्तेमाल कर सकेंगे।
तीन अखाड़ों में होगी साइबर कुश्ती
मुकाबला तीन चरणों में होगा। पहला चरण ‘अखाड़ा’ 15 सितंबर, दूसरा ‘दंगल’ 24 सितंबर और अंतिम चरण ‘केसरी’ 9 अक्टूबर को होगा। पहले चरण से 50 और दूसरे चरण से 10 टीमें फाइनल में पहुंचेंगी।
अंतिम मुकाबला नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में होगा। यहां प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के सामने अपने सुरक्षा आकलन का बचाव करना होगा। खास बात यह होगी कि मानव विशेषज्ञों के निष्कर्षों के साथ मशीन के स्वचालित विश्लेषण को भी सामने रखा जाएगा। इससे पता चलेगा कि एआई और मानव विशेषज्ञ कहां एकमत हैं और कहां मानवीय समझ मशीन के निष्कर्ष को चुनौती देती है।
विजेता बनेगा ‘साइबर केसरी’
मुकाबले की विजेता टीम को ‘साइबर केसरी-2026’ की उपाधि के साथ पारंपरिक गदा प्रदान की जाएगी। आयोजन में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, सूचना साझाकरण एवं विश्लेषण केंद्र और भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल की भागीदारी है।
प्रतियोगिता नियंत्रित वातावरण में आयोजित होगी। किसी लाइव सिस्टम या सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर परीक्षण की अनुमति नहीं होगी। इस तरह ‘साइबर कुश्ती-2026’ सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एआई की रफ्तार और इंसानी समझ को जोड़कर भविष्य की साइबर सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने का प्रयोग भी साबित हो सकती है।




